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*सबके ही सुख-दुख को सहकर अपने सब फर्ज निभाती है* *तभी तो नारी कहलाती है- संगीता सिंगल*

बेटी-बहु कभी मां बनकर
सबके ही सुख-दुख को सहकर
अपने सब फर्ज निभाती है
तभी तो नारी कहलाती है।
महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को औपचारिक मान्यता 1975 में उस वक़्त मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने भी ये जश्न मनाना शुरू कर दिया. संयुक्त राष्ट्र ने इसके लिए पहली थीम 1996 में चुनी थी, जिसका नाम ‘गुज़रे हुए वक़्त का जश्न और भविष्य की योजना बनाना’ था.
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, समाज में, सियासत में, और आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं की तरक़्क़ी का जश्न मनाने का दिन बन चुका है. जबकि इसके पीछे की सियासत की जो जड़ें हैं, उनका मतलब ये है कि हड़तालें और विरोध प्रदर्शन आयोजित करके औरतों और मर्दों के बीच उस असमानता के प्रति जागरूकता फैलाना है, जो आज भी बनी हुई है.

महिला अर्थात करुणा
महिला अर्थात उदारता
महिला अर्थात कोमलता
महिला अर्थात शक्ति
महिला अर्थात सृजन
महिला अर्थात परिवर्तन
महिला अर्थात प्रेरणा

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं!💐

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दिलीप गुप्ता

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