
कल्पवृक्ष खेजड़ी ( पर्यावरण दिवस पर विशेष)
1787 की वृक्ष खेजड़ी की एक अजब कहानी।
अमृता देवी विश्नोई थी कल्पवृक्ष खेजड़ी दीवानी।।
समझा सदियों पूर्व मारवाड़ ने पर्यावरण को,
जोधपुर खेजड़ली गांव अड़ गया वृक्ष रक्षण को,
मेहरानगढ़ में फूल महल का जो निर्माण कराना था
कारिंदे निभा रहे महाराजा अभय सिंह वचन को।
अमृता देवी व बेटियों को देनी पड़ी कुर्बानी।
1787 की वृक्ष खेजड़ी की एक अजब कहानी।।
पर्यावरण दीवाने कहां किसी की सुनते हैं,
वृक्षों को बचाने को मौत भी चुनते हैं,
खेजड़ी का पेड़ तो है आस्था का प्रतीक
60 गांव, 217 परिवार, 363 हुए शहीद।
कल्पवृक्ष खेजड़ी को दुनियां शमी नाम से जानी।
1787 की वृक्ष खेजड़ी की एक अजब कहानी ।।
खेजड़ी फल सांगरी सब्जी,पत्तियों से बकरी भोजन,
और लगता है मेला बलिदानों को करते नमन
नियम बना खेजड़ी वृक्ष कभी नहीं काटा जाएगा।
भादवा सुदी दशम बलिदान दिवस मनाया जाएगा।
पर्यावरण बचाने को याद करो बलिदानी
1787 की वृक्ष खेजड़ी की एक अजब कहानी ।।
अमृता देवी विश्नोई थी कल्पवृक्ष खेजड़ी दीवानी।।
गीता अग्रवाल, हैदराबाद














