बीकानेर। स्थानीय बेनीसर बारी के बाहर, चूना भट्टा के पास चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पंचम दिवस पर कथा वाचक श्री लालजी वैरागी ने भगवान कृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए “पूतना, शकटासुर, तृणावर्त उद्धार, योगी शिव का बाल कृष्ण दर्शन, भगवान के नामकरण संस्कार, ऊखल बंधन, यमलार्जुन उद्धार, माखन चोरी तथा गिरिराज गोर्वधन पूजन” का विशद वर्णन करते हुए कहा कि “प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के कारण आज प्रकृति हमसे रूठ रही है, जिसके कारण चारों तरफ प्राकृतिक प्रकोप के शिकार हम हो रहे हैं, आज से 5200 वर्ष पूर्व ही भगवान ने गिरिराज पूजन कर प्रकृति संरक्षण का मानव जाति को संदेश दिया था जो कि आज की प्रधान आवश्यकता है, अतः इस कथा को सुनकर हमें प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हुए, अधिकाधिक संख्या में वृक्षारोपण और उनका संरक्षण करना चाहिए।”
कथा के प्रारम्भ में पण्डित श्री रामदेव कल्ला के सानिध्य में आज के यजमान श्री संपतलाल कच्छावा और सत्यनारायण कच्छावा ने सपत्नीक पूजन एवं आरती की तथा पार्श्व संगतकारों श्री तरूण कांत, कमल कांत रामावत, मनोज कुमार भादानी, प्रेम कुमार स्वामी ने प्रासंगिक भजनों का सुमधुर गायन किया जिन पर सजीव झांकियों के पात्रों में कुमारी ऋतु कच्छावा कृष्ण रूप धारण कर तन्मय होकर नृत्य किया जिससे प्रेरित होकर दर्शक श्रोता भी झूम उठे।















