
14 अगस्त 2024, बीकानेर। बेनीसर बारी के बाहर, चूना भट्टा के पास चल रही भागवत कथा में व्यास पीठासीन श्री लालजी वैरागी ने छठे दिन की कथा करते हुए भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि “भारतीय जीवन पद्धति में जीवन को 4 आश्रमों में बांटा गया है जिनमें से गृहस्थाश्रम की विशेष महत्ता का प्रतिपादन किया गया है क्योंकि शेष आश्रमियों यथा ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थि और संन्यासियों सहित अपने परिवेश में रहने वाले जीव जंतुओं और प्रकृति के संरक्षण की जिम्मेवारी गृहस्थाश्रमी जनों पर है और इसी कारण भगवान श्री कृष्ण ने विवाह कर सद्गृहस्थ बनने का मानव जाति को संदेश दिया।”
कथा के प्रारम्भ में पण्डित रामदेव कल्ला के वैदिक मंत्रोच्चार सहित आज के यजमान श्री भरत कुमार कच्छावा और श्री ललित कुमार सोलंकी ने भगवान, शुकदेव, ग्रन्थ एवं व्यास पूजन तथा आरती की।
श्री तरूण कांत, कमल कांत रामावत, मनोज कुमार भादानी एवं प्रेम कुमार स्वामी ने प्रसंगानुसार वैवाहिक गीतों/भजनों का गायन किया तथा कुमारी ऋतु, खुशबू और आशा कच्छावा ने सुन्दर सजीव झांकी सजाई ।














