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पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया, तेरापंथ भवन में नमस्कार महामंत्र का हो रहा है – अखंड जप अनुष्ठान

1 सितंबर 2024, रविवार

तेरापंथ भवन, गंगाशहर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा गंगाशहर के तत्वावधान में तेरापंथ भवन में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री चरितार्थ प्रभा जी एवं साध्वी श्री प्रांजल प्रभा जी के पावन सान्निध्य में आज पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी श्री चरितार्थ प्रभा जी ने अपने मंगल उद्बोधन में तीर्थंकर भगवान की स्तुति करते हुए कहा कि एक जैसा जीवन व्यक्ति को पसंद नहीं होता है, नवीनता, उत्साह व उमंग लाने के लिए समय-समय पर पर्व मनाए जाते हैं। पर्युषण महापर्व बाहर की दुनिया से भीतर की दुनिया में प्रवेश करने का महापर्व है। आसक्ति से अनासक्ति, वासना से उपासना, राग से विराग की ओर प्रस्थान ही पर्युषण है। साध्वीश्री जी ने इतिहास के अनेक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि पर्युषण काल में जप, तप, सामायिक, मौन, त्याग व तपस्या के साथ-साथ मोबाइल का वर्जन भी करें। यह समय आत्मा के उत्थान हेतु साधना में लगे, ऐसा प्रयास करना चाहिए। साध्वी श्री प्रांजल प्रभा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्युषण महापर्व पर्वों में अनुत्तर है, सर्वोत्तम है। इस पर्व में धर्म का पोषण होता है। यह आत्म शुद्धि का प्रेरक पर्व है, अतः इस महापर्व कहते हैं। पर्युषण पर्व व्यक्ति के शुद्ध भावों को बढ़ाने वाला तथा विकारी भावों को घटाने वाला है। पर्युषण पर्व मनाने का उद्देश्य आत्म कल्याण करना है। इसमें अहिंसा की चेतना व अध्यात्म की चेतना का॓ जागृत करना है। उन्होंने तेइसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के बारे में बताते हुए उवसग्गहर स्रोत की महत्ता बताई।

साध्वी श्री वैभवयशा जी ने खाद्य संयम के बारे में बताते हुए कहा कि साधना का पहला पैरामीटर है – खाद्य संयम। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन चलाने के लिए आहार करना जरूरी है। जीने के लिए खाना आवश्यक है, परंतु यदि खाने के लिए ही जीना हो, तो यह चिंतन का विषय है। निर्जरा का पहला प्रकार है- अनशन, जिसके अंतर्गत एक दिन से 6 माह तक का उपवास आता है। उन्होंने बताया कि 15 दिन में एक उपवास करना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। व्यक्ति इसके माध्यम से अनेक बीमारियों से निजात प्राप्त कर सकता है। आचार्य तुलसी ने भी खाद्य संयम पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि क्यों, कैसे, कितना, कब व कहां भोजन करना चाहिए। उन्होंने इन सभी प्रश्नों को समाहित करते हुए सात्विक व संयमित भोजन करने पर बल दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पर्युषण गीत के संगान से हुआ।

तेरापंथी सभा के उपाध्यक्ष पवन कुमार छाजेड़ द्वारा श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया गया। तेरापंथी सभा के कोषाध्यक्ष रतनलाल छलाणी ने सभा की गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि तेरापंथ भवन में पर्युषण काल में नमस्कार महामंत्र का अखंड जप अनुष्ठान चल रहा है। सायंकालीन प्रतिक्रमण प्रतिदिन लगभग 6:30 बजे होगा तथा रात्रिकालीन कार्यक्रम शांतिनिकेतन में रात्रि 8:00 बजे से होगा। तेरापंथ युवक परिषद द्वारा अभिनव सामायिक के बैनर का विमोचन उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा किया गया। युवक परिषद के उपाध्यक्ष ललित राखेचा ने बताया कि 3 सितंबर को प्रातः 9:00 बजे तेरापंथ भवन में अभिनव सामायिक का आयोजन किया गया है।

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Prakash Samsukha

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