बीकानेर, 2 सितम्बर। रांगड़ी चैक स्थित पौशधषाला मे चल रहे चातुर्मास मे गच्छाधिपति नित्यानंद सुरीश्वरजी के शिष्यरत्न मुनि पुष्पेन्द्र म सा व मुनि श्रृतानंद म सा ने उपदेश देते हुए बताया कि परम पवित्र पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का तीसरा दिन पौषध का है। आज का परम कत्र्तव्य पौषध विधि है। पौषध चार प्रकार के बताये गये है । आहार पौषध, शरीर सत्कार पौषध, अव्यापार पौषध, बह्मचर्य पौषध । जो आहार से अनाहारी पथ की तरफ ले जाये उसे आहार पौषध कहा जाता है, जो देह से आत्मा की तरफ गति की करा दे उसे शरीर सत्कार पौषध कहा जाता है, सम्पति से हटकर संतोष की तरफ ले जाये उसे व्यापार पोषध कहा जाता है, और भोग से योग की तरफ ले जाये उसे बह्मचर्य पोषध कहा जाता है। सम्बुत प्रकरण 134वीं गाथा में बताया है कि 27 सबज 77 करोड़ 77 लाख 77 हजार 777 से भी अधिक पल्यों को जितना हम देव आयुष्य आठ प्रहर यानी की अहो रात्रि यानि के दिन रात्रि के पोषध करने से प्राप्त होता है ये तो अनन्त फल प्राप्त हुआ परंतु परम फल तो मोक्ष ही है, करनी को सहम के छोटे से सुत्र से पोषध फल का उपचार करने से ही हमारे पुण्यो का बंध शुरू हो जाता है। ये पोषध आत्म गुणों की पौषध आत्म गुणों की शुद्धि,पुष्टि, वृद्धि, करने में उपकारक है। पोषध व्यक्ति को अप्रमत से मनुष्य भवः मनुष्य जो आराधना करता है, शुद्ध भाव का पोषण करता है और अशुद्ध भाव का क्षय करता है और नरक गति को छेदन भेदन करके रखता है इसमे कोई सन्देह नही श्रावक जीवन के 36 कत्र्तव्य मे से एक ओवेषोपोषेवयम पर्व तिथि पर पौषध करने का फरमान किया गया हैं आध्यामिक जगत मे महोषध यानि कि पोषद पुष्टिधार्यम मिति पौषद्म आत्मा की पुष्टि करदे वो पौषध है जैसे आयुर्वेद के अन्दर औषध के मोद ओषध के मुख्य दो गुण देह शुद्धि देह पुष्टि और इसी तरह आध्यामिक क्षेत्र में पोषध के दो महान गुण आत्मा शुद्धि और आत्म पुष्टि। तो परमात्मा का यह आदेश है कि हमारे तीसरे दिन का पौषध का कर्तव्य महान पुण्यशाली आत्माएं पोषध करके अपनी आत्मा को नष्ट करने का यही परमात्मा का परम गति को प्राप्त करने का हमारा लक्ष्य यही परमात्मा का फरमान है।
*आज होगी श्रीकल्प सूत्र पूजा, गुर्जरों से रांगड़ी चौक तक आएगी पदयात्रा*
श्रीकल्प सूत्र पूजा के लाभार्थी परिवार भंवरी देवी मानिकचंद कोचर गंगानगर वालों द्वारा आज सुबह सवा आठ बजे गाजे बाजे के साथ गुजरों के मोहल्ले से रांगड़ी चौक तक पैदल यात्रा के साथ पहुचेंगें तथा पौषधशाला मे जैन मुनियों के सान्निध्य में सभी श्रावक श्राविकाओं के साथ श्रीकल्प सूत्र पूजा होगी।
इसके साथ ही मतिज्ञान पूजा का लाभ शांतिलाल मानकचंद सेठिया परिवार, श्रृत ज्ञान पूजा के लाभार्थी पद्मादेवी पूनमचंद नेमचंद बरडिया, अवधि ज्ञान पूजा के पुष्पा देवी, सुरेंद्र कुमार बद्धानि परिवार, मन: प्रवह ज्ञान पूजा का लाभ पद्मादेवी पूनमचंद नेमचन्द बरडिया , केवल ज्ञान पूजा का लाभ छोटूलाल मूलचंद प्रदीप कुमार बेद परिवार द्वारा लिया गया।
प्रवचन से पूर्व बड़ी संख्या में श्राविकाओं ने प्रभु के उपयोग हेतु हाथ से निर्मित बहुत ही आकर्षक पारणे गुरु महाराज के सामने अर्पण किए। इन हस्त निर्मित पारणों की प्रतियोगिता रखी गई है जिसका परिणाम आज घोषित किया जाएगा और विजेताओं का बहुमान किया जाएगा।
कार्यक्रम के संयोजक अजय बेद ने बताया की आज की प्रभावना रिद्धकरण हनुमान दास सिपानी, ओसवाल साॅप परिवार द्वारा की गई तथा नेमीनाथ भगवान भव यात्रा के दौरान प्रस्तुत नाटिका की 20 प्रतिभागी श्राविकाओं का बहुमान आत्मानंद जैन सभा, हड़मान दास, पन्नालाल परिवार तथा शांतिलाल हनुजी देवेंद्र कुमार कोचर द्वारा किया गया।













