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जल मंदिर की प्रतिकृति से पावापुरी तीर्थ की भगवान महावीर के जयकारों के साथ भाव यात्रा
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बीकानेर, 31 अक्टूबर। जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वर महाराज के निर्देशन में ढढ्ढा चौक के कोठारी भवन में भगवान महावीर के निर्वाण दिवस व दीपावली पर्व पर पावापुरी तीर्थ के जल मंदिर की थर्माकोल से बनाई गई को देख बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाव यात्रा की। भगवान महावीर का जयकारा लगाते हुए उनके आदर्शों का स्मरण किया।
जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी ने बताया कि भगवान महावीर अंतिम 16 प्रहर देशना पावापुरी तीर्थ में दी थी। बिहार के नालंदा जिले की पावापुरी में भगवान महावीर स्वामी के अनेक भव्य मंदिर है, जिसमें जल मंदिर की शोभा न्यारी है। पावापुरी में राजगीर और बोधगया के समीप नालंदा जिले का एक शहर है। भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति पावापुरी में हुई थी, इसलिए पावापुरी सम्पूर्ण जैन धर्मावलंबियों के लिए दर्शनीय, वंदनीय पवित्र तीर्थ स्थल है। इसके दर्शन वंदन करने से पापों का क्षय व पुण्यों का उदय होता है।
बीकानेर के मुनि संवेग रतन सागर महाराज ने उततराध्ययन सूत्र में भगवान महावीर की अंतिम देशना का वर्णन करते हुए कहा कि हुए कहा कि रूप नहीं आत्म स्वरूप को निखारने से कल्याण होता है। नित्य बदलने वाले रूप् को सजाने, संवारने पर भी चेहरे पर झुरियां आदि पड़ने से जीर्ण क्षीण होता है। राम-द्वेष से सर्वथा रहित स्वरूप आत्मा ही वितराग दशा को प्राप्त कर सम्पूर्ण ज्ञानमय दशा को प्राप्त कर सकते है। श्री जिनेश्वर देव की आत्मा अपने अंतिम भव में निर्मल कोटि के तीन ज्ञान सहित ही उत्पन्न होती है। उनका अंतिम भव ज्ञान प्रधान जीवन युक्त होता है । उन्होंने विभिन्न स्वप्नों व उसके फलादेश के बारे में बताया। मुनिश्री संवेग रतन सागर महाराज के सांसारिक चाचा लोकेश कुमार, तेजेश राज सावनसुखा परिवार की ओर से प्रभावना से श्रावक-श्राविकाओं का अभिनंदन किया।

भगवान महावीर का निर्वाण कल्याणक
जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी की निश्रा मे शुक्रवार को भगवान महावीर का निर्वाण कल्याण जप, तप व मंदिरों में पूजा के साथ मनाया जाएगा। शनिवार 2 नवम्बर को भगवान महावीर स्वामी के मंदिरों में चतुर्विद संघ के साथ निर्वाण का लड्डू चढाया जाएगा।

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Prakash Samsukha

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