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“सुन्न दाग, बदरंग निशान, कुष्ठ रोग की है पहचान”,कुष्ठ रोग खोज, सर्विलांस व उन्मूलन को लेकर आशा सहयोगिनियों को दिया प्रशिक्षण
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“सुन्न दाग, बदरंग निशान, कुष्ठ रोग की है पहचान”

कुष्ठ रोग खोज, सर्विलांस व उन्मूलन को लेकर आशा सहयोगिनियों को दिया प्रशिक्षण

बीकानेर, 31 जनवरी। “स्पर्श” कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान के अंतर्गत एक्टिव केस की खोज, सर्विलेंस व उन्मूलन को लेकर आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण दिया गया। शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन सभागार में आयोजित प्रशिक्षण में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पुखराज साध ने जानकारी दी कि चमड़ी पर चमड़ी के रंग से फीका, एक या एक से अधिक दाग या धब्बे जिसमें सुन्नपन, सूखापन, पसीना न आता हो, खुजली या जलन, चुभन न होती हो, तो कुष्ठ रोग हो सकता है। शरीर पर, चेहरे पर, भौंहो के उपर, कानों के उपर सूजन-गठान, दाने या तेलीय चमक दिखाई पड़े, तो कुष्ठ रोग हो सकता है। हाथ पैर में सुन्नता, सूखापन एवं कमजोरी होने पर भी कुष्ठ की जाँच करवानी चाहिए।
डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ लोकेश गुप्ता ने बताया कि कुष्ठ रोग एक मामूली बीमारी है, जो एक जीवाणु (लेप्रा बेसिली) से होता है, यह कोई छुआछूत का या आनुवंशिक रोग नहीं है। उन्होंने गत 3 वर्ष से एक्टिव केस रहे क्षेत्रों में नए कुष्ठ रोगी ढूंढने, उसके संपूर्ण निःशुल्क उपचार कराने तथा राज्य सरकार द्वारा द्वारा विभिन्न योजनाओं में दिए जा रहे लाभ से लाभान्वित करने के निर्देश दिए।
नर्सिंग अधिकारी हीरा भाटी ने बताया कि बहु औषधीय उपचार -एमडीटी (कुष्ठ निवारक औषधी) कुष्ठ की शर्तिया दवा है, जो सभी सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त में उपलब्ध है। उन्होंने रोगियों संबंधी रिपोर्टिंग व रेकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण दिया।
जिला कार्यक्रम समन्वयक रेणु बिस्सा ने बताया कि पॉसीबैसिलरी (पीबी) के कुष्ठ रोगी की तलाश कर उपचार शुरू करवाने पर आशा सहयोगिनी को 250 रुपए तथा मल्टीबैसिलरी (एमबी) के कुष्ठ रोगी का उपचार शुरू करने पर 200 रुपए का इंसेंटिव दिया जाता है। प्रशिक्षण में बीकानेर शहरी क्षेत्र की आशाएं शामिल हुई।

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Prakash Samsukha

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