
पूरे घर की जान होती हैं बेटियाँ,
दो कुलों का मान होती हैं बेटियाँ,
बेटी से आबाद है घर-परिवार,
मां-बाप की आन हैं बेटियां….
बेटियों के भविष्य को अच्छा बनाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जाती हैं। इन योजनाओं के माध्यम से बेटियों की सुरक्षा की जाती है, साथ-साथ उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। केंद्र सरकार ने 2015 में ऐसी ही एक योजना को शुरू किया था। इस योजना के माध्यम से ना केवल बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है बल्कि बेटियों को हायर एजुकेशन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। इसका उद्देश्य बेटी के माता-पिता को बेटियों को हायर एजुकेशन के लिए प्रोत्साहित करना भी है। यह योजना बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा को सुनिश्चित करती है। यह बेटी और बेटे के बीच समानता स्थापित करने में भी कारगर साबित हुई है। बेटी और बेटे की समानता स्थापित करने में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का धरातल रूप में भी असर देखने को मिल रहा है। जहां एक समय में बेटा होने के आशीर्वाद और बेटा होने की खुशियां मनाई जाती थी वहीं अब बेटी के पैदा होने पर परिवार के सदस्य बहुत खुश होते हैं और लक्ष्मी का रूप मानते हुए उसका स्वागत बड़े ही धूमधाम से किया जाता है।
गंगाशहर, बीकानेर के स्वर्गीय मगनलाल जी गहलोत जिनका देहांत 6 महीने पहले हुआ। उनकी हार्दिक इच्छा थी कि अगर उनके घर लक्ष्मी स्वरूपा पडपौत्री हुई तो वे ओर उनका परिवार लक्ष्मी का स्वागत बड़े ही धूमधाम से करेंगे । उनकी इच्छा के अनुरूप हेमंत गहलोत पुत्र श्री सुंदरलाल जी गहलोत द्वारा अपने घर में आई नन्ही परी का स्वागत बड़े ही धूमधाम से बीकानेर में आयोजित किया। समाज के गण मान्य नागरिक इस आयोजन में सम्मिलित हुए और सभी ने नन्ही परी को स्वस्थ रहने और समाज में अच्छे कार्य करके नाम रोशन करने का आशीर्वाद दिया ।















