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आखिर  लंबी लड़ाई के बाद जीत हुई सच्चाई की दिनेश सिंह भदोरिया
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आखिर लम्बी लड़ाई लड़ी यहाँ तक पुलिस केश से भी विचलित नहीं हुए, डरे नहीं भागे नहीं कोई स्वार्थ नहीं पर, इतिहास को या आजादी से पूर्व भले हो वो राजपूत घराने रहे हों मगर उन्होंने अपनी जनता जागीर के जीवन स्वास्थ के हित आजादी से पहले ही बड़े बड़े असताल बनाये हर राज्य के राजाओं से कुछ ना कुछ योग दान जन हित मै राजवाडो के राज्य मै जरूर किया जिसका फायदा आज की जनता को मिल रहा है सरकार उन सुविधा का किस प्रकार उपयोग करती है या नहीं ये सरकारों पर निर्भय है अब बात आती है राजस्थान के बीकानेर के पूर्व राज परिवार की तो बीकानेर की जनता ही नहीं सम्पूर्ण राजस्थान की जनता इस सच्चाई से इनकार नहीं करती की केवल बीकानेर ही नहीं सम्पूर्ण भारत का सर्वे करवाया जावे तो संभवतः ही नहीं सच्चाई यही है की पूर्व बीकानेर राज परिवार के हर राजा की दूर दर्शिता का यह परिणाम यह है की पूर्व राजपारिवार के द्वारा बीकानेर मै आने वाले दो से तीन दशक तक की सोच ओर समय समय पर बढ़ती जन संख्या को समझते हुए अस्पताल एक नहीं दो नहीं पाँच दर्जन अलग अलग बीमारिओं के अस्पताल एक ही पेरी फेरी यानि करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र को केवल अस्पतालो से सम्बंधित बिल्डिंग, हॉस्टल, लेबोरेट्री, धर्म शाला, कॉलेज के क्षत्रवास आदि आदि के लिए आज से 90 साल पहले ही छोड़ दिया था मगर एक ऐसा समय आज से तीस पेंती श साल पहले आया की संभाग के सबसे बड़े अस्पताल मैं भामाशाह, दान दाताओं के द्वारा अपने पूर्वजों,, ट्रस्टो के द्वारा पृथक प्रथक बीमारिओं के अस्पतालो का निर्माण करवाना सुरु हुआ जो स्वागत योग्य था आज भी नए नए अस्पतालो का निर्माण जारी है पी, बी, एम, अस्पताल प्रसाशन उस एम, ओ, यू, को भूल गया या जानबूझकर, दबाव आदि की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि तीस पेंतीस  सालों से बनाये जा रहे अस्पताल, मुख्य द्वारों पर उन दान दाताओं के ट्रस्ट या जिनकी स्मृति मै अस्पताल बना उनका नाम बड़े बड़े मुख्य दार, बोर्डिं, उपचार से जुड़े हर बड़े से छोटे दस्तावेजों यानि सबसे छोटी साईकिल की पर्ची से भी पी, बी, एम, शब्द हटा ही दिए गऐ यह होने लगा तब,, ऐतिहासिक इमारते बचाओं,संघर्ष समिति तथा टीम सावधान इण्डिया 077 के द्वारा उस समय के क्षत्रिय सभा के अध्यक्ष सहित सभी को अवगत करते हुए हालांकि आगे जिस संघर्ष का जिक्र करू उससे पहले कुछ उन नामो का जिक्र करना जरुरी होगा जिनमे श्री प्रहलाद सिंह मार्शल, तेज सिंह मेहेलीय, सूरजमाल सिंह नीमराना, राजेंद्र सिंह कक्कू, जितेंद्र सिंह सेंस्वास, लाल सिंह राजपुरोहित, राजेंद्र सिंह राजपिरोहित, गजराज सिंह भरिजा,, नरेन्द्र सिंह श्याणी,गिरी राज सिंह भाटी, विश्व जीत सिंह हराशर, ओर हर समय रहे क्षत्रिय सभा बीकानेर के अध्यक्ष सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी ने इस प्रकरण को जागर्त करने लड़ाई लड़ने यही कई अवसर ऐसे आये की खुद सरकारी यानि भारतोय रेल मै नौकरी की परवाह ना करते हुए पी, बी, एम, के उन बड़े बड़े मार्बल के नाम पट्ट, शिला लेखों को अपने हाथों से खुद कैप्टन ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया, प्रहलाद सिंह मार्शल आदि ने कई कई हजारों के होल्डिंग, 6बाई 6के मोटे मोटे काले रंग के मार्बल जिन पर पी, बी, एम, अंकित नहीं था उन्हें क़ानून हाथ मै लेकर तोड़ा ओर प्रसाशन को बाध्य किया की इस कैम्पस मै अरबों रुपयों के दान से दान दाता, भामाशाह यहाँ जो भी अस्पताल या कुछ भी जन हित का निर्माण कराते है हम उनका स्वागत करते है मगर किसी भी द्वार, बोर्ड, होल्डिंग, प्रत्येक दस्तावेजों पर दान दाताओं के नाम जिनकी स्मृति मै कोई भी बिल्डिंग बनाई गई है उनके नाम से पहले बड़े बड़े अक्षरों मैसम्बंधित चिकित्सालय वर्ग प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल अस्पताल लिखना अनिवार्य होगा ज्ञात हो हाल ही मै एक बड़े 7बाई सात के बड़े शिला लेख पर पी, बी, एम, कहीं अंकित नहीं था तब उस शिला लेख को सफ़ेद रंग से दान दाता के नाम को मिटाया गया था बाद मै ठाकुर भदौरिया के दबाव सभी के सहयोग साथ ही वर्तमान क्षतरीय सभा बीकानेर के अध्यक्ष श्री करण पाल सिंह सिसोदिया, डूंगर सिंह टेहन्देशर, प्रदीप सिंह चौहान आदि का भी सहयोग रहा यानि दो माह से ही देखने मै आया की पी, बी, एम, प्रसाशन अब हर बोर्ड, होल्डिंग, मुख्य द्वार, सभी दस्तावेजों पर पूरा नाम सम्बंधित चिकित्सालय वर्ग प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल अस्पताल लिखा जाने लगा है ओर इन सभी संघर्ष कर्ताओं उनके काफी संख्या मै भी ख़ुल कर संघर्ष किया जिनका नाम का जिक्र यहाँ करने से फेहरिस्त लम्बी हो जायेगी उनके योग दान को भी सदा याद किया जावेगा इस ब्लॉग शिवम सिंह भदोरिया को लिखते वक़्त ख़ुशी इस बात की हो रही है की अब तक के दान दाताओं से आठ गुना ज्यादा यानि करोड़ों रूपये लगाकर 19 तारीख़ को सबसे ऊँची, सबसे लम्बी, सबसे चौड़ी शानदार अस्पताल कलकत्ता के रेल स्टेशन के मुख्य बिल्डिंग के नक़्शे की याद दिलाने वाली मुख्य बिल्डिंग पर वास्तविक रूप से पूर्व राज परिवार द्वारा उस समय की प्रथम सरकार को ये जगह बबिल्डिंग को सौंपते हुए जो एम, ओ, यू, हुआ जिस ओर इस  तीस से पैतिस साल से लगातार चौबीसों घंटे नजर रखने वाले आ रहे कैप्टन ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया के द्वारा केवल सावधान इण्डिया 077 के बैनर तले ही नहीं दो साल पूर्व क्षत्रिय सभा बीकानेर द्वारा प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल अस्पताल का हॉस्पिटल विजिटिंग मेंबर मनोनीत करने के बाद उस अधिकार का भी प्रयोग कर आने वाले समय मै हमारी जायज मांग का सदैव ध्यान रखा जावे उसी का परिणाम है की अब सफलता मिली इतिहास को जिन्दा रखने महान लोगों हर वर्ग के जाती समुदाय के महा पुरुषो,, आदि के त्याग समाज को दिए योगदान को जिन्दा रखने की मुहीम को सफलता मिली ये ठाकुर भदौरिया सहित समुर्ण बिकाना की जीत है की इतिहास को बरकरार रखने के संघर्ष करना पड़ता है रिष्क लेना पड़ता है दुश्मन भी त्यार होते है पर गर्व उस युवक ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया को जो लगातार संघर्ष करता रहा,, जय बिकाना,,

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