
यूँ ही नहीं कहा जाता है कैप्टन ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया को, लावारिस लाशों का वारिस
, आज ठाकुर को सपतनिक देवी माता के सवा घंटे से अधिक चलने वाले अनुष्ठान मै बैठने का निर्धारित प्रोग्राम था किन्तु जैसे ही ठाकुर को खिदमतगार सोसाइटी के सोएब खान तथा राज कुमार खाड़गावत के द्वारा सुचना दी गई की जी, आर, पी, थाने के द्वारा रेलवे स्टेशन पर से घायल अवस्था मै यानि बीमार अवस्था मै उपचार हेतु भर्ती कराया गया था दौराने उपचार उसकी मृत्यु हो गई उसके परिजनों का पता नहीं चला यानि वो लावारिस ही था आज उसका जी, आर, पी, थाने के द्वारा पोस्ट मार्टम कराया गया बाद मै ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया, सोएब खान, राजकुमार खड़गावत ओर उनके अन्य साथिओं की मदद से उक्त मुश्लिम लावारिस मृतक के सव को बड़ी क़ब्रगाह,, बागे जन्नत,, लें लाया गया वहां पर मुश्लिम धर्म के अनुसार पूर्ण रीति रीवाज के साथ सुपुरदे खाक किया गया,, जी, आर, पी, थाने के सिपाहीओं, अधिकारिओं ने इन सभी सेवा दारों का आभार जताया की कुछ लोग ईद ओर कुछ लोग नवरात्रा पर्व मनाने की जगह वास्तविक निश्वार्थ समाज सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर,, एक लावारिस लास का अंतिम संसकार को अपना प्रथम कर्तव्य मान कर इस प्रकार से सेवा कर रहे है ये युवाओं के प्रेरणा के योग्य सन्देश है,, सोएब खान ने कहा की हम लोगों को ठाकुर दिनेश सिंह भदौरिया से ही प्रेरणा मिली है,, ज्ञात हो भदौरिया अब तक अपनी टीम सावधान इण्डिया 077 के हजारों साथिओं की सहायता से 8500 से अधिक अंतिम संस्कार पिछले 40 सालों मै करवा चुके है,, इसी लिए ठाकुर को प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा,, लावरिसो का वारिश, लावारिस लाशों का चितेरा, गुम बच्चों का गार्जिन कहा जाता है













