आर्यन पब्लिक सीनियर सैकेंडरी स्कूल में आयोजित पैरेंट्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम एक ऐसा सशक्त मंच रहा, जहाँ विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवाद, समझ और सहयोग को नई दिशा मिली। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों को विद्यालय की शैक्षणिक नीतियों, गतिविधियों, मूल्य-आधारित शिक्षण प्रक्रिया, अनुशासन प्रणाली और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से अवगत कराना रहा ताकि छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु अभिभावक और विद्यालय मिलकर एक सहयोगी वातावरण बना सकें।
शाला प्रभारी श्रीमती अपूर्वा व्यास ने पैरेंट्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन अभिभावकों के लिए आयोजित किया गया था, जिनके बच्चे विद्यालय में नवीन रूप से प्रवेशित हुए हैं या जिनकी शिक्षा यात्रा एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। कार्यक्रम में कक्षा आधारित मूल्यांकन प्रणाली, गृहकार्य नीति, परीक्षाओं की प्रक्रिया, सह-शैक्षणिक गतिविधियों, जैसे- खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विज्ञान एवं कला की महत्ता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में इनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। साथ ही डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म्स और तकनीकी संसाधनों का परिचय देते हुए शिक्षण में तकनीक की उपयोगिता समझाई गई। अभिभावकों को शिक्षक-अभिभावक संवाद की प्रक्रिया, नियमित रूप से आयोजित होने वाली बैठकें एवं विद्यार्थियों की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक आवश्यकताओं के प्रति विद्यालय की रणनीतियों एवं मूल्यपरक शिक्षा के साथ अनुशासन और व्यक्तित्व विकास की योजनाओं से अवगत कराया गया।
डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, जो कि एक प्रतिष्ठित नेशनल करियर काउंसलर हैं, ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और एक बेहद प्रेरणादायक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने आज के बदलते करियर परिवेश, नई शिक्षा नीति, स्किल-बेस्ड लर्निंग और अभिभावकों की भूमिका पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि बच्चों के भविष्य की नींव उनके माता-पिता और विद्यालय दोनों मिलकर रखते हैं। यदि यह नींव मजबूत है, तो बच्चा किसी भी दिशा में अपने सपनों की उड़ान भर सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को प्रतियोगिता के दबाव से मुक्त रखें और उनके भीतर की वास्तविक क्षमताओं को समझकर उन्हें प्रोत्साहित करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री रामजी व्यास, अध्यक्ष, विद्यालय प्रबंधन समिति ने की। उन्होंने अध्यक्षीय भाषण में शिक्षा को संस्कार और समाज निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि विद्यालय और घर – दोनों ही बच्चे के निर्माण के स्तंभ हैं। यह कार्यक्रम इन दोनों स्तंभों के बीच की दूरी को पाटने का प्रयास है। श्री व्यास ने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे विद्यालय के शिक्षकों के साथ मिलकर एक साझी सोच के साथ बच्चों को न केवल अकादमिक उत्कृष्टता की ओर, बल्कि एक जिम्मेदार, संवेदनशील और आत्मनिर्भर नागरिक के रूप में आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करें। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए समस्त विद्यालय परिवार और उपस्थित अभिभावकों का आभार भी व्यक्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय प्रधानाध्यापक श्री मुकेश व्यास ने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवीन शिक्षण विधियों, मूल्य-आधारित शिक्षा, परीक्षाओं की पद्धति और विद्यार्थी हितैषी वातावरण की जानकारी दी। शाला व्यवस्थापिका श्रीमती ज्योति कल्ला ने स्कूल के प्रशासनिक पक्ष, सुरक्षा व्यवस्था, छात्र अनुशासन और दैनिक दिनचर्या से अभिभावकों को अवगत कराते हुए बताया कि हमारा उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की ओर प्रेरित करना है। शाला के श्री हरिप्रसाद व्यास ने अभिभावकों से संवाद करते हुए उन्हें सहयोगात्मक भागीदारी के लिए प्रेरित किया और बच्चों के नैतिक मूल्यों पर आधारित निर्माण में परिवार की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने विद्यालय की पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम उनके बच्चों की शिक्षा और व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से संवाद कर अपनी शंकाएँ भी साझा कीं, जिन्हें विद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया और उत्तर प्रदान किए।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर, एक ऐसा साझा मंच बना जहाँ विद्यालय और अभिभावकों ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की दिशा में एकता और प्रतिबद्धता का भाव प्रकट किया। इस कार्यक्रम ने विद्यालय और अभिभावकों के मध्य विश्वास, संवाद और सहयोग को और अधिक मजबूत किया तथा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक प्रभावी कदम सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के दौरान शाला के समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणि स्टाफ सदस्यों का उल्लेखनीय योगदान रहा।














