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तेरापंथ भवन बीकानेर में  223 वाँ भिक्षु चरमोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया
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तेरापंथ भवन बीकानेर में 223 वा भिक्षु चरमोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया

बीकानेर। बीकानेर तेरापंथ भवन में विराजित आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री द्वय साध्वी मंजू प्रभा जी और साध्वी कुंथु श्री जी के मंगल सन्निधि में 223 वा भिक्षु चरमोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया गया । केंद्र से निर्धारित प्रवचन के विषयों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी पर आचार्य भिक्षु के जीवन काल के अंतिम भाद्रपद की शिक्षाएं इस पर विशेष प्रकाश डालते हुए साध्वी कुंथु श्री जी ने अपने उद्बोधन में कहा आचार्य भिक्षु धर्म क्रांति के अग्रदूत और विलक्षण पुरुष थे । उनका चरित्र महान था, हौसला बुलंद था और इरादे मजबूत थे ।

आचार्य भिक्षु के धर्म क्रांति का आधार था भगवान महावीर की वाणी सत्य और सिद्धांत उनके आधार स्तंभ थे सत्य के प्रति पूर्ण समर्पित प्राण थे साधना और आचार के क्षेत्र में व्याप्त शिथिलता के प्रति बगावत की । उन्होंने अपने जीवन में अनेक जीवों को सम्यकत्व प्रदान करवाई,अनेकों को चारित्र धर्म की आराधना में जागरूक किया । उनका जीवन जीता जागता शिक्षा संबोध था । अंतिम समय में आत्म विशुद्धि के परम लक्ष्य के साथ चतुर्विध धर्मसंघ को सम्यक शिक्षाएं प्रदान की । भाद्रपद शुक्ला द्वादशी के दिन पानी उपरांत तीन आहार का त्याग कर दिया । शरीर के पुद्गल क्षीण होते प्रतीत होने लगे । तब उससे पूर्व समस्त वहां उपस्थित धर्म संघ को सामूहिक रूप से शिक्षा देते हुए बोले जो समझो श्रद्धा सम्मान मेरे प्रति था वही भारीमल के प्रति रखना । वह गण का नाथ है । परस्पर हित सौहार्द रखना । गुट बंदी नहीं करना । दीक्षा देने में पूरी सावधानी रखना । अयोग्य व्यक्ति को मत मुंड लेना । श्रद्धा आचार में कोई भी मतभेद हो तो बैठकर चिंतन चर्चा करना,आग्रह विग्रह मत करना । समिति गुप्ति में सावधान रहना । शिष्य उपकरण आदि की ममता मत करना । परोपकारी हित शिक्षाओं के माध्यम से वह अपने शिष्यों में सिद्धांतों की सही समझ धारण करने के लिए जागरुक कर रहे थे । सत्य निष्ठा, संयम निष्ठा आचार निष्ठा समता की साधना और एक आचार्य के अनुशासन में चलने की प्रेरणा प्रदान करवा रहे थे ।अंत में समाधि मृत्यु का वरण कर एक अलबेला महान संत पद्मासन मुद्रा में इस संघ से संसार से विलीन हो गया । ऐसे बलिदानी सत्य अन्वेषक सिद्धांत निष्ठ महान आचार्य पुरुष को शत-शत प्रणाम । साध्वी वृंद ने भिक्षु को वंदन शत-शत बार गीत को सुमधुर स्वर दिया। सुंदर लाल झाबक ,पारस मल छाजेड़, महिला मंडल मंत्री रेनू बोथरा ने अपने विचार व्यक्त और गीत के माध्यम से प्रस्तुत किया ।

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Prakash Samsukha

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