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राजस्थानी युवा रचनाकारों की कविताओं में मातृभूमि प्रेम, मायड़ भाषा गौरव के साक्षात दर्शन
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राजस्थानी भाषा अकादमी की ओर से ‘राजस्थानी युवा कवि-कवयित्री सम्मेलन’ आयोजित

बीकानेर, 23 सितम्बर। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से सांस्कृतिक सृजन पखवाडे़ के तहत मंगलवार को अकादमी सभागार में राजस्थानी युवा कवि-कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान आठ युवा रचनाकारों ने पूर्ण उत्साह के साथ अपनी राजस्थानी कविताओं के माध्यम से देश-प्रदेश व राजस्थानी भाषा-संस्कृति की महिमा का गुणगान किया।
         अकादमी सचिव शरद केवलिया ने कहा कि बीकानेर के राजस्थानी युवा रचनाकार प्रतिभाशाली हैं, इनकी कविताओं में मातृभूमि प्रेम व मायड़ भाषा गौरव के साक्षात दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक सृजन पखवाडे़ जैसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन मिलेगा। कार्यक्रम संचालिका कवयित्री मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि बीकानेर के युवा कवि-कवयित्रियों का भविष्य उज्ज्वल है। सोनी ने ‘देस-विदेस में डंका बाजै राजस्थानी ठाट रो’ कविता से राजस्थान का बखान किया।
राजस्थानी कविताओं से किया मंत्रमुग्ध-  इस अवसर पर युवा कवि गोविन्द सोनी ने ‘भारत देस महान’ व ‘म्हैं तो राजस्थानी’, सुधा सारस्वत ने ‘गंगा सी निरमळ पावन आ राजस्थानी भासा‘, आयुष अग्रवाल ने ‘मायड़ भासा म्हारी’ व ‘कुण करसी रुखाळ’, शीतल चौधरी ने ‘भारत जिसी संस्कृति और कठै’, आनंद छंगाणी ने ‘म्हारी मरुवाणी’, रेणु प्रजापत ने ‘प्यारो राजस्थान’ व ‘वीरां री धरती’,  कपिला पालीवाल ने ‘आखो जगत भारत रो जस गावै’ व ‘सौरम’, अक्षिता जोशी ने ‘परिवार’ आदि कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
     इस अवसर पर युवा रचनाकारों को अकादमी की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किये गये। सूचना सहायक केशव जोशी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्रीनिवास थानवी, अंजली टाक, हरिशंकर पुरोहित, मधुसुदन सोनी, कानसिंह, मनोज मोदी, लियाकत अली सहित अनेक साहित्य-प्रेमी उपस्थित थे।
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Gordhan Soni

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