बीकानेर, 25 नवम्बर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने शुक्रवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में प्रवचन में कहा कि जीवन में व्यक्ति के पाप व पुण्य कारण, परिणाम की समझ जरूरी है। पाप-पुण्य की समझ से व्यक्ति अनेक बुराइयों, कठिनाईयों व कर्म बंधनों से बच सकता है तथा सच्चा धार्मिक बनकर मोक्ष के मार्ग पर चल सकता है।
उन्होंने कहा कि अजीव (सांसारिक विषय भोग की वस्तुओं) की बजाए जीव, आत्मा व परमात्म तत्व की सही पहचान करें। अजीव (निर्जीव) के प्रति ममत्व, मुर्छा, ममता, आसक्ति व राग के भाव का त्याग कर जीवात्मा, आत्मा व परमात्मा से प्रेम व मैत्री रखें। अजीव का गलना, सड़ना व नष्ट होना निश्चित है, आत्मा व परमात्मा नित्य रहने वाले अजर अमर है।
ज्ञान वाटिका का विशेष सत्र 26 को
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि म.सा. के सान्निध्य में रविवार को सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में ज्ञान वाटिका का विशेष रविवारीय सत्र होगा। खरतरगच्छ युवा परिषद के अध्यक्ष अनिल सुराणा ने बताया कि विभिन्न कक्षाओं में अध्ययन करने वाले बालक-बालिकाओं के सर्वांगीण विकास एवं संस्कार निर्माण के लिए विशेष सत्र प्रत्येक रविवार को आयोजित करने का लक्ष्य है। संगठन के सचिव विक्रम भुगड़ी ने बताया कि दो घंटें के इस शिविर में रचनात्मक कौशल, गहुली व रंगोली बनाना, जीवन कौशल, आत्म रक्षा, शैक्षणिक और भाषा कौशल, शैक्षणिक परामर्श, संचार एवं मंच, भाषण व वाद विवाद कौशल, योग एवं ध्यान, प्रेरणादायी कथा एवं मूल्य शिक्षा, भक्ति गीत एवं समूह खेल मनोरंजक प्रतियांगिताएं होगी । खरतरगच्छ महिला परिषद की बीकानेर शाखा मंत्री लीला कोठारी व श्वेता कोठारी को शिविर के लिए नामांकन करवाया जा सकेगा। ज्ञान वाटिका की प्रभारी सुनीता नाहटा ने बताया कि ज्ञान वाटिका का वार्षिकोत्सव 2 नवम्बर को होगा जिसकी तैयारी चल रही है।
उदासर के जिनालय में तीन नूतन प्रतिमाओं की स्थापना 10 नवम्बर को
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि म.सा. के सान्निध्य में उदासर के 150 वर्ष प्राचीन भगवान सुपार्श्वनाथ के मंदिर में तीन प्रतिमाओं की स्थापना 10 नवम्बर 25 को गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, व साध्वी दीपमाला श्रीजी आदिठाणा के सान्निध्य में होगा। सम्पूर्ण कार्यक्रम के लाभार्थी सुश्रावक किशन लाल, ओम प्रकाश, हेमंत, अरिहंत कोठारी, संगीता, श्वेता व मोनिका, सन्नव, रुतविक, रीति कोठारी उदासर निवासी परिवार हैं । लाभार्थी ओम प्रकाश कोठारी ने बताया कि नव स्थापित मूर्तियों में महालक्ष्मी, नाकोड़ा भैरव व दादा गुरु देव की प्रतिमाएं है। मंदिर में प्रतिष्ठा उत्सव के दौरान ध्वजा रोहण, स्वामी वात्सल्य का लाभ भी इसी परिवार ने लिया है। उन्होंने बताया कि श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के तत्वावधान में होने वाले कार्यक्रम के तहत 9 नवम्बर भक्ति संध्या होगी।




























