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शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में मंत्रों व भक्ति गीतों की गूंज
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शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में मंत्रों व भक्ति गीतों की गूंज
बीकानेर, 23 नवम्बर। डेढ़ शताब्दी प्राचीन शिवबाड़ी के जीर्णोंद्धार के बाद नव निर्मित गंगेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में रविवार को सामूहिक स्नात्र पूजा व परमात्मा के 18 अभिषेक के समय मंत्रों व भक्ति गीतों की गूंज रही। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के साथ नो प्रमुख जिन बिम्बों की मंगलमूर्तियों के दर्शन-वंदन किए।
पूजा के लाभार्थी हस्तीमल सेठी ने बताया कि  इनमें भगवान आदिनाथ, भगवान महावीर स्वामी, श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ, श्री नाकोडा भैरव, पण सहित भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा, अनंत लब्धि निधान गणधर गौतम स्वामी, मणिधारी दादा श्री जिन चन्द्र सूरी, देवी पदमावती, श्री शांति नाथ चंतीर्थीं, श्री सिद्ध चक्र यंत्र, अष्टमंगल पाटली के दर्शन किए।
सेठी ने बताया कि जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ से सम्बद्ध ज्ञान वाटिका की प्रभारी सुनीता नाहटा के नेतृत्व में बालक-बालिकाओं ने भक्ति गीतों के साथ स्नात्र पूजा, उसके बाद 18 अभिषेक तथा शांति कलश की स्थापना करवाई। करीब चार घंटें चली पूजा में विचक्षण महिला मंडल के साथ अनेक विशिष्ट श्रावकों ने भी भागीदारी निभाई।
दादा गुरुदेव पार्श्वचन्द्र सूरी
की 470 वीं पुण्यतिथि पर भक्ति संगीत के साथ पूजा
बीकानेर, 23 नवम्बर। गंगाशहर रोड पर स्थित पार्श्वचन्द्र बगीची में जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ की साध्वी पदम प्रभा व सुव्रताश्रीजी के नेतृत्व में रविवार को भक्ति संगीत के साथ पूजा की गई। दादा गुरुदेव की अष्ट प्रकार की पूजा में श्री पार्श्व महिला मंडल की सदस्याओं ने एक जैसी गणवेश में भक्तिगीत प्रस्तुत किए वहीं मंत्रोच्चारण वयोवृद्ध साध्वीश्री सुव्रताश्रीजी ने किया।
श्री जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया ने बताया कि संघ के मंत्री प्रताप रामपुरिया, पार्श्व महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती मधु रामपुरिया, पप्पूजी बांठिया आदि ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए । पूजा व गौतम प्रसादी का लाभ त्रिलोकचंद, हीरालाल, पारसमल, रविन्द्र कुमार व चिराग रामपुरिया परिवार ने लिया। विधि विधान से पूजन सौरभ राखेचा व प्रमोद गोलछा तथा श्री पार्श्व महिला मंडल ने करवाया। मंदिर के साथ नवनिर्मित भवन में भी पूजा की गई। भगवान आदिनाथ, दादा गुरुदेव पार्श्वचन्द्र सूरी तथा भैरवनाथ की प्रतिमाओं पर विशेष श्रृंगार किया गया ।

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Gordhan Soni

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