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खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी का नगर प्रवेश 4 फरवरी को,गंगाशहर गोल मंदिर परिसर के जिनालय 15 नूतन व प्राचीन प्रतिमाओं की अंजनशलाका-प्रतिष्ठा 8 फरवरी 26 को
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खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी का नगर प्रवेश 4 फरवरी को
गंगाशहर गोल मंदिर परिसर के जिनालय 15 नूतन व प्राचीन प्रतिमाओं की अंजनशलाका-प्रतिष्ठा 8 फरवरी 26 को,
बीकानेर, 20 जनवरी । गंगाशहर के 177 वर्ष प्राचीन जीर्णेद्धारोपरान्त नवनिर्मित त्रिशिखरीय शिखरबद्ध जिनालय में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान सहित 15 नूतन व प्राचीन प्रतिमाओं की अंजन शलाका-प्रतिष्ठा 8 फरवरी 26 को खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरी महाराज की निश्रा में होगी। पांच दिवसीय प्रतिष्ठा महोत्सव 4 से 8 फरवरी तक चलेगा। जिनालय का द्वार का उद्घाटन 9 फरवरी को सुबह शुभ समय होगा।
महोत्सव भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट एवं सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, गंगाशहर व बीकानेर के तत्वावधान में होगा। खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी महाराज अपने सहवृति मुनियों व साध्वीवृंद के साथ 4 फरवरी को नगर प्रवेश करेंगे। भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि बीकानेर के उप नगर गंगाशहर के चौराहे के मध्य एक वृताकार संकुल में भगवान श्री सांवलिया पार्श्वनाथ के मंदिर की प्रतिष्ठा 177 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1905 में वैशाख शुक्ला पूर्णिमा को आचार्यश्री जिन सौभागय सूरिजी महाराज ने की। वर्ष 2015-16 में जिनालय की स्थिति को देखते हुए ट्रस्ट ने निर्णल्य लिया कि इस मंदिर का जीर्णोंद्धार शास्त्र विधान के अनुसार किया जाए।
बांठिया ने बताया कि खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी से स्वीकृति प्राप्त कर ट्रस्ट मंडल ने जीर्णोंद्धार का पुनीत कार्य नवम्बर 2021 में जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ के महोपाध्याय भुवन चन्द्र व उनकी आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री पदमप्रभा, सुव्रता श्रीजी व मरुतप्रभा की शुभ निश्रा में खात मुर्हूत शिलान्यास किया गया। भारत के अनेक ट्रस्ट, पेढी व संघों के सहयोग से त्रि-शिखरीय जिनालय का कार्य शुरू किया गया जो अब युद्ध स्तर पर कार्य से पूर्णता की ओर अग्रसर है। सफेद संगमरमर का ध्वजदंड सहित 54 फीट ऊंचा है जिनालय गोल मंदिर में सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान का मंदिर सड़क से साढ़े दस फीट व ध्वज दंड सहित 54 फीट ऊंचा है। मंदिर का ध्वज दंड छह शताब्दी प्राचीन भांडाशाह जैन मंदिर के शिखर से दिखाई देगा। मंदिर के द्वार की ऊंचाई 29 फीट है। मुख्य द्वार के दोनों और दो छोटे द्वार भी बनाएं गए है। मंदिर में 96 फीट का रैम्प व 23 पेड़ियां बनाई गई है। अहमदाबाद के ऋषभ सोमपुरा की देखरेख में मंदिर में वर्तमान में उ़ड़ीसा, सिरोही व बीकानेर के करीब 60 कारीगर कार्य कर रहे है। मंदिर में 55 गुणा 33 वर्ग फीट की भोजनशाला, 21 गुणा 65 वर्ग फीट का प्रवचन हॉल बनाया गया है। नौ कमरो की धर्मशाला भी बनाई जाएगी।

इन प्रतिमाओं की होगी प्रतिष्ठा
भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट के मंत्री मनोज बांठिया ने बताया कि भगवान सांंवलिया पार्श्वनाथ की 177 वर्ष प्राचीन व शांति गुरुदेव की प्राचीन प्रतिमा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की अंजनशलाका-प्रतिष्ठा होगी। उन्होंने बताया कि मंदिर के तोरण पर भगवान पार्श्वनाथ की माता विद्यादेवी के स्वप्न में दिखाई दी अष्ट मंगल सहित 14 वस्तुओं को दिग्दर्शित किया गया है। सात तोरण में परमात्म संगीत वाद्य यंत्रों के साथ प्रभु भक्ति में लीन 14 अप्सराओं को स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि मंदिर के गर्भ गृह में मूलनायक सांवलिया पार्श्वनाथ, पदमप्रभु व वासुपुज्य स्वामी की, कोली मंडप में महावीर स्वामी, गौतम स्वामी की, रंग मंडप में खाडासन भगवान आदिनाथ व शांतिनाथ की , गोखलों में देवी पदममावती, चक्रेश्वरी देवी व सरस्वती देवी की, रंग मंडप के दूसरे गोखले में शिखरजी की, भोमियाजी की, बटूक भैरव व नाकोड़ा भैरव की प्रतिमा, मंदिर के दोनों ओर युग प्रधान दादा गुरुदेव पार्श्वचन्द्र सूरिश्वरजी की तथा योगीराज शांति गुरुदेव की प्रतिमा की स्थापना होगी।
राम निवास बगीची थी अतीत में गोल मंदिर
पुरा लेखों के अनुसार 5200 गज में स्थापित गंगाशहर का गोल मंदिर अतीत में नाम रामनिवास बगीची था। इसकी स्थापना धर्मनिष्ठ श्रावक फौजराज बांठिया के सुश्रावक दादा रामचन्द्र बांठिया पुत्र सुश्रावक बींजराज बांठिया ने करवाई थी। बाद में महाराजा गंगासिंह ने इस स्थान का पट्टा सुश्रावक फौजराज बांठिया के नाम से जारी किया। अनेक वर्षों तक फौजराज बांठिया ने इसकी देखरेख व सार संभाल की। उसके बाद 25 अक्टूबर 1966 में ट्रस्ट बनाकर बांठिया परिवार के देव,गुरु व धर्म में समर्पित श्रावकों को जिम्मा सौंपा।
छतीस कौम करती है परिक्रमा
गंगाशहर के गोल मंदिर के भगवान सांवलिया पार्श्वनाथ की पूरी तथा उसके पीछे बने भगवान केदार नाथ की परिक्रमा छतीस कौम गंगाशहर व बीकानेर के आते-जाति वक्त नमन, वंदन व परिक्रमा करती है । मंदिर के प्रति श्रद्धाभाव से लोग सिर झुकाते है तथा ध्वज के दर्शन कर अपने दिन की दिनचर्या करते है। मंदिर के अंजन में जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ, तपागच्छ, पार्श्वचन्द्र गच्छ, साधुमार्गी जैन संघ, शांत क्रांत संघ व जैन श्वेताम्बर तेरापंथ संघ, बीकानेर, गंगाशहर, भीनासर सहित अनेक प्रवासी नागरिकों जैन व जैनेतर सभी वर्ग व समुदाय के लोगों व श्रावक-श्राविकाओं का अंजन शलाका-प्रतिष्ठा में सहयोग व समर्थन मिल रहा है।

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Prakash Samsukha

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