
बुखार सिर्फ संक्रमण नहीं, हर झटका मिर्गी नहीं : डॉ. जी.एस. तंवर ने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में दी नई दिशा
डॉ. तंवर ने कॉन्फ्रेंस में तोड़ी पुरानी मिथक
बीकानेर, 20 जनवरी.
कोलकाता में दिनांक16 से 20 जनवरी 2026 तक आयोजित सेंट्रल इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के 63 वें वार्षिक सामनेलन में पीबीएम अस्पताल के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीएस तंवर ने स्वास्थ्य की दुनिया को नई रोशनी दी। डॉ. जी.एस. तंवर ने दो ऐसे विषयों पर अपने शोध का व्याख्यान दिया, जो बच्चों की सेहत की पुरानी कहानियों को नया मोड़ दे रहे हैं।
*बुखार की रहस्यमयी दुनिया ओर “संक्रमण से आगे की यात्रा पर रखी बात
कल्पना कीजिए, एक बच्चा तप रहा है, लेकिन वजह वायरस या बैक्टीरिया नहीं – बल्कि कोई गहरा रहस्य जैसे संयोजी ऊतक का विकार, कैंसर या बोन मैरो की छिपी बीमारी! डॉ. तंवर ने टीओटी मॉड्यूल में देशभर के चुनिंदा विशेषज्ञों को यह सिखाया कि बुखार सिर्फ संक्रमण की कहानी नहीं बताता। उन्होंने वास्तविक केसों के जरिए दिखाया: बुखार के प्रकार, वैज्ञानिक पहचान, शरीर पर प्रभाव और तर्कसंगत उपचार कि जानकारी दी एवं अनावश्यक जांचों और एंटीबायोटिक्स के जाल से बच्चों को मुक्त रखने का स्पष्ट सन्देश दिया.
डॉ. तंवर ने बताया कि भारत के विकास के साथ गैर-संक्रामक बीमारियाँ बढ़ रही हैं, और यह मॉड्यूल उन्हें पहचानने का जादुई चश्मा दे रहा है। मार्च 2026 में बीकानेर में भी ऐसी कार्यशाला होगी, जहाँ स्थानीय डॉक्टर नई सोच अपनाएंगे।
सम्मेलन में इसी तरह के सेशन्स, जैसे “प्लेटलेट पैनिक” पर चर्चा, ने सबको सोचने पर मजबूर किया।
अनैच्छिक हरकतों का रहस्य, मिर्गी की छाया को विस्तार से बताया
बच्चों में झटके, ताने या अजीब गतिविधियाँ देखकर हर कोई मिर्गी का नाम लेता है, लेकिन डॉ. तंवर ने पैनल चर्चा में इस मिथक को तोड़ा। उन्होंने बताया कि ये अक्सर ए टैक्सिया, ट्रेमर, डिस्टोनिया या स्टीरियोटाइपी जैसे नॉन-एपिलेप्टिक विकारों से आती हैं। गलत निदान से बच्चे सालों तक अनावश्यक दवाएँ खाते रहते हैं, लेकिन व्यवस्थित नैदानिक तरीके से सही पहचान हो तो वे सामान्य जीवन जी सकते हैं! डॉ. तंवर की विशेषज्ञता ने चर्चा को जीवंत बनाया.
डॉ. तंवर ने अपने उद्बोधन में आमजन को संदेश दिया कि सही सोच, सही निदान,सुरक्षित उपचार ही बच्चों के खुशहाल भविष्य की असली चाबी है।



























