










गंगाशहर के श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में 15 प्रतिमाओं की
अंजन शलाका प्रतिष्ठा आज, गाजे बाजे से निकला भव्य वरघोड़ा
बीकानेर,7फरवरी। खरतरगच्छाधिपति, आचार्यश्री श्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी महाराज, आदिठाणा व साध्वीवृंद के सान्निध्य में गंगाशहर के 177 वर्ष प्राचीन श्री सांवलिया पार्श्वनाथ जिनालय (गोल मंदिर में) चल रहे अंजन शलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत शनिवार को भव्य गाजे बाजे के साथ वरघोड़ा (रथ-शोभायात्रा) निकला। भगवान पार्श्वनाथ के दीक्षा विधान को सजीव लीला के रूप् में प्रस्तुत किया गया। प्रतिमाओं की अधिवासना व अंजन विधान हुआ । भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि भव्य वरघोड़ा (रथ-शोभायात्रा) बांठिया चौक से रवाना होकर, आसानियों का चौक, गोलछा, नाहटा, रांगड़ी चौक, श्री चिंतामणि जैन मंदिर, बड़ा बाजार घूम चक्कर,, भांडाशाह जैन मंदिर , गोपेश्वर बस्ती होते हुए श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में पहुंचा। वरघोड़े में पंचान्हिका महोत्सव में राजा का स्वरूप धारण करने वाले न्यू दिल्ली के पुलिस कमीशनर राजा व नीशू बांठिया सजे संवरे हाथी पर बैठे हुए प्रभावना कर रहे थे। वहीं प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले पांच बग्गियों पर सवार थे। वहीं घोड़ों, ऊंटों पर श्रावक पंच रंगी जैन ध्वज लिए हुए थे। फौज राज बांठिया परिवार के करीब 250 श्रावक श्राविकाएं फैंटा, एक सा कुर्ता पजामा व साड़ियां पहने हुए मंगल गीत गाते व नाचते हुए चल रहे थे। वरघोड़ा मार्ग पर दों बैंड पार्टियां भजनों की धुनें बजा रही थी वहीं पंजाब की ढोल पार्टी ढोल बजाकर लोगों को नाचने पर आतुर कर रहीं थी।
वरघोड़े में शामिल विभिन्न गच्छ व समुदाय के श्रावक-श्राविकाए श्रावक श्राविकाओं का शंख ध्वनि से तथा जगह -जगह पेयजल, शर्बत व राबड़िया से स्वागत सत्कार किया गया। इंदौर से आए मोहित शर्मा ने रास्ते में 25 से अधिक स्थानों पर चिताकर्षक रंगोली बनाकर वरघोड़े का स्वागत किया। गच्छाधिपति जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी व मुनि वृंद ने श्री चिंतामणि जैन मंदिर, भांडाशाह जैन मंदिर में दर्शन वंदन किया। उनका श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष हरीश नाहटा व ट्रस्टियों ने तथा रास्ते में अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने गंवळी सजाकर वंदन अभिनंदन किया। रास्ते में पूर्व शिक्षा मंत्री बुलाकी दास कल्ला,उद्योगपति कन्हैयालाल बोथरा, श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के पूर्व अध्यक्ष निर्मल धारीवाल, उद्योगपति व समाज सेवी बसंत नवलखा, खरतरगच्छ संघ ट्रस्ट के अध्यक्ष अजीत मल खजांची सहित जैन श्वेताम्बर तेरापंथ, साधुमार्गी जैन संघ, खरतरगच्छ, पार्श्वचन्द्र व तपागच्छ तथा शांत क्रांत संघ के पदाधिकारियों व श्रावक-श्राविकाओं ने स्वागत किया। वहीं खरतरगच्छ युवक परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक राजीव खजांची, स्थानीय इकाई अध्यक्ष अनिल सुराणा, मंत्री विक्रम भुगड़ी, खरतरगच्छ महिला परिषद की अध्यक्ष मनीषा खजांची व मंत्री लीला बेगानी, ज्ञान वाटिका के बालक-बालिकाओं, आदि ने भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट व सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट गंगाशहर बीकानेर के इस आयोजन में भागीदारी निभाई। अनेक स्थानों पर बैनर व स्वागतद्वार बनाएं गए। श्राविकाओं के समूह का निर्देशन श्रीमती शीबूजी बांठिया कर रहीं थी ।
भगवान पार्श्वनाथ का दीक्षा कल्याणक-महोत्सव के तहत शनिवार को अस्थाई तौर पर बनी वाराणसी नगरी (तेरापंथ भवन) में भगवान पार्श्वनाथ के दीक्षा कल्याणक विधान के दौरान मुंबई के संगीतकार श्री नरेन्द्र भाई वाणीगोता के साथ उपस्थित श्रावकाओं ने वैराग के गीत गाए । मंत्रोच्चारण खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी व गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने किया।
प्रवचन-खरतरगच्छाधिपति, आचार्यश्री श्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी महाराज ने कहा कि आत्म कल्याण व पराक्रम तथा पुरुषार्थ करने वाले जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ कल्याणक से प्रकरणा लें। भगवती दीक्षा बिना कल्याण व केवल्य ज्ञान तथा निर्वाण असंभव है। उन्होंने कहा कि दीक्षा कल्याणक का यह सजीव प्रसंग व उत्सव चिंतन करने की प्रेरणा देता है। हमें अपने अंतर हृदय को निहारना है, भावों को शुद्ध करते हुए आत्म व परमात्म स्वरूप् को पहचानने का प्रयास व पुरुषार्थ करना है। संसार में असली सुख द्रव्य, पदार्थों व इंद्रियों से नहीं भाव से आत्म परमात्म, देव, गुरु व धर्म की भक्ति करने में है। उन्होंने कहा कि संसार व संसार की सभी वस्तुएं, मानव काया का स्वरूप प्रतिपल बदल रहा है । बदलते समय में अपने आपको पहचाने तथा आत्मानंद की प्राप्ति के प्रयास करें।
जिनालय में मूर्तियों की प्रतिष्ठा आज
महोत्सव के पांचवें दिन रविवार को मंगल मुर्हूत में परमात्मादि की महा मंगलकारी 15 प्रतिमाओं के अंजन शलाका व प्रतिष्ठा होगी। इस मंदिर की 13 नूतन प्रतिमाओं के साथ देश प्रदेश के विभिन्न जिनालयों में स्थापना के लिए आई करीब 21 प्रतिमाओं की अंजन शलाका होंगी। इसी दिन खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभ सागर सूरिश्वरजी का मांगलिक, शाही करबा और फले चुंदड़ी, दोपहर में अष्टोत्तरी शांति स्नात्र महापूजन होगा। जिनालय के द्वार का उद्घाटन 9 फरवरी को सुबह शुभ मुर्हूत में होगा।
भव्य उत्सव में साध्वीवृंद की भागीदारी- शरीर की स्थिति के अनुसार काफी समय से रामपुरिया मोहल्ले के रामपुरिया उपासरे में प्रवास कर रही जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ की वयोवृद्ध साध्वीश्री पदम प्रभा व सुव्रताश्रीजी काफी समय के बाद गंगाशहर के श्री सांवलिया पार्श्वनाथ जिनालय के उत्सव में शामिल होने पहुंची। खरतरगच्छ की साध्वी बीकानेर मूल की दीपमाला व शंखनिधि श्रीजी भी वरघोड़े मे साथ थी।




























