














गंगाशहर के श्री सांवलिया पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में 15 प्रतिमाओं की
अंजन शलाका प्रतिष्ठा, भामाशाहों का अभिनंदन, द्वार का उद्घाटन आज
बीकानेर,8 फरवरी। खरतरगच्छाधिपति, आचार्यश्री श्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी महाराज, गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बालमुनि मीत प्रभ सागर, पार्श्वचन्द्र की वयोवृद्ध साध्वी पदम प्रभा व सुव्रताश्रीजी, खरतरगच्छ संघ के साध्वी दीपमाला व शंखनिधि,श्रावक-श्राविकाओं के चतुर्विद संघ की साक्षी में रविवार को गंगाशहर के 177 वर्ष प्राचीन श्री सांवलिया पार्श्वनाथ जिनालय (गोल मंदिर में) में 15 प्रतिमाओं की अंजन शलाका प्रतिष्ठा हुई।
भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट, व सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, गंगाशहर,बीकानेर के तत्वावधान में मंदिर निर्माण तथा पंचाह्न्कि जिन भक्ति महोत्सव आयोजित किया गया। प्रतिष्ठा के बाद शाही करबा और फले चंदडी, तथा अष्टोतरी शांति स्नात्र महा पूजन हुआ। मंदिर में प्रतिष्ठा के बाद दर्शन करने वालों का हजूम उमड़ पड़ा। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ, तपागच्छ, पार्श्वचन्द्र गच्छ, तेरापंथ, साधुमार्गी संघ, शांत क्रांत संघ, श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास, श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के पदाधिकारियों व अनुयायियों ने श्रद्धा भक्ति के साथ मंदिर में दर्शन किए तथा गच्छाधिपति जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी, मुनियों व साध्वीवृंद से आशीर्वाद लिया। मंदिर में नई ध्वजाएं चढ़ाई गई। सोमवार को सुबह शुभ वेला में जिनालय के द्वार का उद्घाटन तथा दोपहर सतर भेदी पूजा होगी।
जिन बिम्बों-गुरु प्रतिमा-देवी देवताओं की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा
भगवान श्री पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोंद्धार ट्रस्ट, व सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि मंदिर की 13 नूतन प्रतिमाओं के साथ देश प्रदेश के विभिन्न जिनालयों में स्थापना के लिए आई करीब 21 प्रतिमाओं की अंजन शलाका हुई। इन में भगवान पार्श्वनाथ तथा योगीराज शांति गुरुदेव की प्रतिमाएं प्राचीन है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान सांवलिया पार्श्वनाथ के साथ पद्म प्रभु व वासु पुज्य स्वामी की, कोली मंडप में भगवान महावीर स्वामी व गौतम स्वामी, रंग मंडप में भगवान आदिनाथ व शांतिनाथजी की काले संगमरमर की खडगासन प्रतिमा, नाकोड़ा भैरव, भोमियाजी व बटूक भैरव, देवी पदमावती, चक्रेश्वरी देवी व सरस्वती देवी की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। मंदिर के बाहर गोखले में एक और योगीराज शांति गुरुदेव की तथा दूसरी और दादा गुरु देव पार्श्वचन्द्र सूरिश्वरजी की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा की गई है।
भामाशाहों व अतिथियों का अभिनंदन
गंगाशहर के तेरापंथ भवन अस्थाई वाराणसी नगर में मंदिर निर्माण में परोप-अपरोक्ष सेवाएं देरे वालों व भामाशाहों का अभिनंदन किया गया। पूर्व शिक्षामंत्री डॉ.बुलाकी दास कल्ला, वयोवृद्ध पंडित नथमल पुरोहित, फतेहचंद डागा परिवार के वरिष्ठ सदस्य तथा अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष चंपालाल डागा, विमल डागा, विनोद डागा, पारस डागा, जय चंद लाल डागा, दिल्ली के विनोद कांकरिया,राजीव मेहता, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ दिल्ली के प्रांतीय कार्यवाही अनिलजी, सह प्रांतपाल दिनेश यादव, दिल्ली के उप पुलिस कमीशनर, हेमंत तिवारी, कुशलपाल सिंह, मुंबई के संगीतकार नरेन्द्र भाई वाणीगोता, खरतरगच्छ युवा परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक राजीव खजांची, अध्यक्ष अनिल सुराणा, मंत्री विक्रम भुगड़ी, खरतरगच्छ महिला परिषद की अध्यक्ष मनीषा खजांची, मंत्री लीला बेगानी, हनुमानदास, मंगनी देवी सिपानी परिवार के शांति विजय सिपानी, संदीप सिपानी, सेठिया परिवार, सहित आदि का सम्मान धनपत सिंह बांठिया, रविन्द्र बांठिया, नई दिल्ली उतर के पुलिस कमीशनर राजा बांठिया, मनोज व संजय बांठिया आदि सेठ श्री फौजराज बांठिया परिवार के सदस्यों ने किया। बांठिया परिवार के परिजनों रिश्तेदारों ने भी मंदिर निर्माण व प्रतिष्ठा महोत्सव में भागीदारी निभाने वाले बांठिया परिवार का अभिनंदन किया। वहीं खरतरगच्छ युवा परिषद ने राजा बांठिया का अभिनंदन किया।
प्रवचन-गच्छाधिपति जिन मणि प्रभ सूरिश्वरी ने तेरापंथ भवन (वाराणसी) नगर में प्रवचन में कहा कि गंगाशहर के गोल मंदिर में स्थापित सांवलिया पार्श्वनाथ मंदिर तीर्थं के रूप् में प्रतिष्ठित हो गया है। श्रावक-श्राविकाएं नियमित मंदिर में पूजा, दर्शन व वंदन को दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। अंतर मन के उल्लास से परमात्मा की साधना, आराधना व भक्ति करें। उल्लास कर्म बंधन में नहीं कर्म निर्झरा में होना चाहिए। उन्होंने श्रोणिक महाराजा का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में समता व सम्यक भाव रखे। सम्यक दर्शन से जीवन के भाव, दर्शन व परिणाम बदल जाते है। धर्म के क्षेत्र में उल्लास के साथ कार्य करते हुए शुद्ध, धर्म व आध्यात्मिक भाव से आचरण, स्वभाव व विचार से भविष्य का निर्माण करें। गच्छाधिपति जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी, गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर का कम्बली से अभिनंदन सेठ श्री फौजराज बांठिया पार्श्वनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया, रविन्द्र बांठिया, मनोज बांठिया आदि ने, श्री पार्श्वचन्द्र गच्छ संघ के अध्यक्ष रविन्द्र रामपुरिया व प्रताप रामपुरिया आदि ने किया।
गच्छाधिपति का विहार
खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी महाराज अपने सहवृति मुनियों के साथ सोमवार को ही सुबह साढ़े नौ बजे गंगाशहर से नाल की ओर विहार करेंगे। वे फलौदी, सेहरावा आदि स्थानों से होते हुए जैसलमेर पहुंचेंगे। जहां उनके सान्निध्य में 6 से 8 मार्च तक दादा गुरुदेव का चादर महोत्सव होगा।




























