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14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ चरण वंदन दिवस’ घोषित करने की मांग



बीकानेर। ब्रह्मलीन संत रामसुखदास महाराज की प्रेरणा से स्थापित गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति भारत द्वारा 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ चरण वंदन दिवस’ घोषित किए जाने की मांग की गई है। समिति का कहना है कि वर्तमान समय में पाश्चात्य प्रभाव के कारण पारिवारिक संस्कारों में निरंतर गिरावट देखी जा रही है, विशेषकर युवाओं में माता-पिता के प्रति सम्मान, कर्तव्यबोध एवं सेवा की भावना में कमी आ रही है।

समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी ने बताया कि गत वर्ष समिति द्वारा माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री से भेंट कर इस विषय पर विमर्श किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणामस्वरूप शिक्षा विभाग ने राज्य के प्रत्येक विद्यालय में 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने के आदेश जारी किए। इसके लिए समिति ने शासन का आभार व्यक्त किया है।

उन्होंने कहा कि यदि 14 फरवरी को राज्य स्तर पर ‘मातृ-पितृ चरण वंदन दिवस’ के रूप में घोषित किया जाता है, तो समाज में माता-पिता के प्रति श्रद्धा, आदर एवं कृतज्ञता की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे भारतीय संस्कृति तथा पारिवारिक मूल्यों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

समिति ने जनहित एवं सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों में संस्कार, सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारियों की भावना को बढ़ावा दिया जा सके।

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Gordhan Soni

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