

बीकानेर, 2 जून । श्री डूंगरगढ़ तहसील के ऊपनी गांव में श्री वासुदेव गौ शाला समिति, की ओर से 26 मई से आयोजित श्री राम कथा का समापन मंगलवार 2 जून 26 को श्रीराम राज्याअभिषेक के बाद हुआ। बुधवार को कथा वाचक पंडित राकेश भाई पारीक के सान्निध्य में सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया जाएगा।
कथा का वाचन विवेचन करते हुए सुप्रसिद्ध कथा वाचक राकेश भाई पारीक ने भजनों व गोस्वामी तुलसी दास कृत ’’राम चरित मानस’’ के भगवान श्री राम के राज्याभिषेक व राम राज्य के सुन्दर प्रसंगों का वर्णन अनेक चौपाइयों के माध्यम से कर श्रोताओं को ’’जयश्रीराम, जय-जयश्री राम, सियाभर राम चन्द्र की जय’’ आदि नारों को लगाने के लिए मजबूर कर दिया। पूरा कथा मंडप राम मय हा गया। अयोध्या के सिंहासन पर त्रिभुवन के स्वामी, मर्यादा पुरुषोतम राम के विराजने के आनंद उत्सव का वर्णन पंडित पारीक ने ’’बिप्रन्ह दान बिबिधि बिधि दीन्हे। जाचक सकल अजाचक कीन्हे। सिंघासन पर ि़त्रभुवन साईं। देखि सुरन्ह दुंदुभी बजाई’’, ’’ नभ दुंदुभी बाजहिं बिपुल गंधर्ब किनर गावहीं। नाचहिं अपछराबृंद परमानंद सुर मुनि पावही’’ व ’’दैहिक दैविक, भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुति ब्यापा।। सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वर्ध निरत श्रुति नीति।। आदि अनेक चौपाइयां सुनाई। उन्होंने कहा भगवान राम के राज्य में किसी को दैहिक (शारीरिक), देवी व प्राकृतिक, सांसारिक, कष्ट नहीं रहते । सभी मनुष्य परस्पर प्रेम करते है, वेदों में बताई गई नीति और अपने धर्म का पालन करते हैं।
पंडित राकेश भाई पारीक ने रामचरित मानस के उतर कांड की चौपाई ’’कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिरि-सुमिरि नर उतरहि पारा।।’’ सुनाते हुए कहा कि कलियुग में भगवान का स्मरण या नाम जप से ही भवसागर यानि संसार से पार जाने का प्रमुख साधन है। कलियुग में कठिन तपस्या या यज्ञ के बिना भी केवल प्रभु के नाम का स्मरण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि अपने में व्याप्त काम,का्रेध, लोभ व मोह आदि के रूप में प्रतिष्ठित रावण का वध कर भगवान श्री राम की मन व आत्मा में प्रतिष्ठा करें।
कथा के आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता देवीलाल, धन्नाराम, अखाराम तथा पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा ने व्यास पीठ पर विराजित कथा वाचक राकेश भाई पारीक का शॉल, श्रीफल से सम्मान किया।













