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फिर आन्दोलन की राह पर विश्नोई समाज,कानून न बनने पर विधानसभा का करेंगे घेराव


बीकानेर। राजस्थान सरकार द्वारा खेजड़ी सहित सभी पेड़ों के संरक्षण के लिए सख्त कानून (ट्री एक्ट) लागू करने की वादाखिलाफी के विरोध में  बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने एक बार फिर हुंकार भरते हुए आन्दोलन का बिगुल बजा दिया है और 20 जुलाई को बीकानेर के जिला  कलक्ट्रेट के सामने विशाल जनसभा और रैली का आयोजन किया गया है। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिल भारतीय  विश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र बुडिया ने कहा कि पूर्व में सरकार द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद ठोस कानून न बनने के  कारण सर्वसमाज में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य चेतावनी है कि यदि सरकार द्वारा समय रहते पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने  वाला कड़ा कानून नहीं बनाया गया,तो वे अगने महीने विधानसभा का घेराव करने से भी हिचकिचाहट नहीं करेंगे। बुडिया ने कहा कि इस सांके तिक धरने व प्रदर्शन में बीकानेर,जोधपुर,बालोतरा,बाड़मेर,जैसलमेर,नागौर सहित प्रदेशभर से सर्वसमाज के लोग शामिल होंगे। पूर्व पार्षद मनोज  विश्नोई ने कहा कि सरकार के लिखित आश्वासन के बावूजद खेजड़ी की कटाई के लिये ना कानून बना ना कटाई रूकी,इस बार पर्यावरण प्रेमी सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की पैरवी करने वाले नेताओं के भरोसे समाज नहीं है। अगर इस विधानसभा सत्र में कानून नहीं बनेगा तो पंचायत व निकाय चुनावों में भाजपा को आईना भी दिखा देंगे।
पत्रकार वार्ता में मांगीलाल नोखड़ा,मोखराम धारणिया,भोमाराम भादू,हेतराम डूडी,दिनेश,रामदयाल  बेनीवाल,सुनील सींगड़,मुकेश पन्नू,लक्ष्मण कुमावत,राकेश विश्नोई,संदीप खींचड़,अनिल विश्नोई भी मौजूद रहे।

लिखित आदेश हुआ जारी,पूरे प्रदेश में लगाया गया था प्रतिबंध
हड़मान बेनीवाल ने कहा कि फरवरी माह में आन्दोलन के बाद सीएम से हुई वार्ता के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया। राजस्व विभाग के  सचिव ने लिखित रूप में आदेश जारी किया है कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर सख्त रोक लगाई गई है। सभी जिला कलेक्टरों को  निर्देश दिए गए हैं कि अब कोई भी खेजड़ी नहीं कटेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। सौर ऊर्जा कंपनियों द्वारा भूमि अधिग्रहण के नाम पर सदियों  पुराने खेजड़ी के पेड़ों की अभी तक अंधाधुंध कटाई की जा रही है। पेड़ काटने वालों पर नाममात्र का जुर्माना लगाया जा रहा है,जिससे वे बेखौफ  होकर हरे पेड़ों को नष्ट किया जा रहा हैं।

कुलदीप का बहिष्कार,पंचायत चुनाव में दिखाएंगे आईना
आन्दोलनकारियों का कहना है कि समाज किसी प्रकार से गुटों में नहीं बंटा है। किन्तु कुलदीप विश्नोई खेजड़ी बचाओं आन्दोलन के किसी भी आयोजन में नहीं आते है। ऐसे में उनका बहिष्कार किया गया है।खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष कहा जाता है जिसे रेगिस्तान का ‘कल्पवृक्ष’  या ‘जीवनरेखा’ कहा जाता है। बिश्नोई समाज के लिए यह केवल एक पेड़ नहीं,बल्कि उनकी आस्था और संस्कृति का अटूट हिस्सा है। जिस  पर चोट कतई बर्दाश्त नहीं होगी।

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Gordhan Soni

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