बीकानेर। आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चों की रुचि मोबाइल और वीडियो गेम की ओर बढ़ रही है, वहीं बीकानेर के सुभाषपुरा क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय स्वरूपा सोनी ने अपने अनोखे शौक से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। स्वरूपा ने पिछले छह वर्षों में देश-विदेश की 4000 से अधिक अलग-अलग डिज़ाइन की माचिस की डिब्बियों का दुर्लभ संग्रह तैयार किया है।
स्वरूपा ने बताया कि उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में माचिस की डिब्बियां संग्रहित करना शुरू किया था। धीरे-धीरे परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों के सहयोग से उनका यह संग्रह लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में वह सातवीं कक्षा की छात्रा हैं और पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस अनोखे शौक को भी पूरा समय देती हैं।
स्वरूपा का कहना है कि उनका सपना अपने इस संग्रह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का है। वह भविष्य में भारत के प्रमुख संग्रहकर्ताओं में अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं और विश्व रिकॉर्ड बनाने का भी लक्ष्य रखती हैं।
स्वरूपा बताती हैं कि उन्हें इस संग्रह की प्रेरणा उनके पिता किशन लाल सोनी से मिली, जो स्वयं भी संग्रहकर्ता हैं। परिवार के सदस्य और परिचित जब भी किसी नए शहर या विदेश की यात्रा पर जाते हैं तो वहां से अलग-अलग डिज़ाइन की माचिस की डिब्बियां उनके लिए लेकर आते हैं। इसी सहयोग ने उनके संग्रह को लगातार समृद्ध किया है।
स्वरूपा के पिता किशन सोनी ने बताया कि इस संग्रह में कई दुर्लभ माचिस की डिब्बियां भी शामिल हैं। इनमें लगभग 10 इंच लंबी तथा सवा इंच जितनी छोटी तिल्ली वाली विशेष माचिस भी मौजूद है। इसके अलावा संग्रह में विभिन्न प्रकार के माचिस कवर और विषयवार लेबल फोल्डर भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिनमें फल, फूल, ऐतिहासिक धरोहर, संस्कृति और अन्य आकर्षक विषयों से जुड़े लेबल शामिल हैं।
स्वरूपा का यह अनूठा संग्रह शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर नई माचिस की डिब्बी उनके संग्रह में एक नई कहानी जोड़ती है। परिवार को उम्मीद है कि आने वाले समय में स्वरूपा का यह संग्रह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर का नाम रोशन करेगा।















