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राजस्थानी अध्ययन केंद्र विश्वविद्यालयों में खोलने की घोषणा का स्वागत, सभी विश्वविद्यालयों में स्थायी राजस्थानी विभाग खोलने की मांग तेज



बीकानेर। राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र खोलने की घोषणा का स्वागत करते हुए राजस्थानी मोट्यार परिषद ने मंगलवार को कोटगेट पर प्रदर्शन कर सरकार एवं राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही परिषद ने मांग की कि केवल अध्ययन केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में स्थायी राजस्थानी भाषा विभाग भी स्थापित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी स्तर तक राजस्थानी भाषा में अध्ययन और शोध का अवसर मिल सके।

परिषद के डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, डॉ. हरिराम बिश्नोई, हिमांशु टाक, राजेश चौधरी एवं रामावतार उपाध्याय ने कहा कि अध्ययन केंद्र खुलने से राजस्थान की भाषा, साहित्य, संस्कृति, इतिहास एवं लोक परंपराओं पर शोध को नई दिशा मिलेगी। इससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से अधिक गहराई से जुड़ सकेगी।

परिषद ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में स्थायी राजस्थानी विभाग स्थापित कर नियमित शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, जिससे विद्यार्थियों को बी.ए., एम.ए. और पीएचडी तक की पढ़ाई अपने ही राज्य में उपलब्ध हो सके।

प्रदर्शन के दौरान परिषद ने यह भी मांग उठाई कि राजस्थान के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मातृभाषा आधारित शिक्षा के उद्देश्य को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

प्रदर्शन में साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार, विनोद सारस्वत, प्रशांत जैन, कमल मारु, सुनील बिश्नोई, नारायण प्रजापत, नख्तूचंद, पृथ्वीराज, पपुसिंह, सरजीत सिंह, राजू नाथ, मोहित बिश्नोई, अजय रील, कैलाश जनागल सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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Gordhan Soni

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