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ओम प्रकाश गोस्वामी की दो पुस्तकों ‘बलदेवचरितम्’ और ‘स्वान्तःसुखाय’ की साहित्यकार सर्वेश भट्ट ने की समीक्षा

जयपुर। तैलंग समाज के विद्वान और सेवानिवृत्त बैंकर श्री ओम प्रकाश गोस्वामी की दो कृतियों की समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार सर्वेश भट्ट ने की है। भट्ट ने जयपुर प्रवास के दौरान गोस्वामी जी से शिष्टाचार भेंट में प्राप्त पुस्तकों का उल्लेख करते हुए दोनों रचनाओं को धार्मिक, आध्यात्मिक और प्रेरक साहित्य बताया।

सर्वेश भट्ट ने अपनी समीक्षा में लिखा कि वर्ष 2018 में प्रकाशित ‘स्वान्तःसुखाय-रचना संग्रह’ धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभूतियों का संग्रह है। इसमें ‘भारत भू’, ‘अन्तर का उफान’, ‘मार्ग में बोध’ और ‘चेतना और स्वप्न’ जैसी रचनाएं शामिल हैं। भट्ट के अनुसार इस संग्रह में भारत भूमि के गौरव का गान और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों का बेहतरीन चित्रण हुआ है।

वर्ष 2016 में प्रकाशित ‘श्री बलदेवचरितम्’ के बारे में भट्ट ने कहा कि यह कृषि के अधिष्ठाता देव बलदेव जी के चरित्र पर आधारित दुर्लभ रचना है। आमतौर पर बलदेव जी को श्रीकृष्ण के अग्रज के रूप में ही जाना जाता है, लेकिन इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को छोटे-छोटे उपशीर्षकों के माध्यम से विस्तार से समझाया गया है।

समीक्षा में भट्ट ने गोस्वामी जी के व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मथुरा के नरी निवासी गोस्वामी जी स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर से मुख्य प्रबंधक पद सेवानिवृत्त हैं। बैंक सेवा के दौरान उन्होंने गृह पत्रिकाओं में कविताएं और लेख लिखे तथा ‘धर्मदीप’ पुस्तक की रचना भी की। उनकी वंश परंपरा में नरी के दाउजी मंदिर का आचार्य पद और शिष्यों को दीक्षा देने का अधिकार भी प्राप्त है।

सर्वेश भट्ट ने दोनों पुस्तकों को साहित्य और समाज के लिए पठनीय और प्रेरक बताते हुए कहा कि गोस्वामी जी का लेखन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से जोड़ने का कार्य करेगा।

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Gordhan Soni

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