“बिना जनप्रतिनिधियों से विमर्श आर्थिक बोझ डालना गलत” – मनीष बाफना
बीकानेर, नगर निगम बीकानेर द्वारा पीपी मॉडल के तहत शहर की सफाई व्यवस्था का टेंडर जारी करने और इसके एवज में आमजन, व्यापारिक व औद्योगिक प्रतिष्ठानों से _यूजर चार्ज_ वसूलने के फैसले पर शहर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। आमजन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों को ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से हस्ताक्षर सहित जनहित ज्ञापन भेजकर इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
*कड़े प्रावधान सिर्फ जनता के लिए?*
ज्ञापन में कहा गया है कि टेंडर में सफाई के बदले शुल्क वसूली के कड़े प्रावधान तो जनता के लिए तय किए गए हैं, लेकिन यदि प्रशासन और सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाए तो क्या प्रावधान होगा, इसका कहीं उल्लेख नहीं है। साथ ही यह टेंडर ऐसे समय में लाया गया है जब निगम में कोई जनप्रतिनिधित्व नहीं है। क्षेत्र के सांसद, विधायक और अन्य सामाजिक संगठनों से कोई विमर्श या धरातलीय आकलन भी नहीं किया गया।
ज्ञापन मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी, पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ और जिला कलेक्टर निशांत जैन को भी भेजा गया है।
*”जनता पर आर्थिक बोझ डालना गलत”*
समाजसेवी और भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता मनीष बाफना ने कहा कि निगम प्रशासन की वर्तमान में लगभग सभी व्यवस्थाएं कुप्रबंधन से ग्रसित हैं। शहर के लिए अच्छी सफाई व्यवस्था जरूरी है, लेकिन बिना जनता और जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किए और प्रशासन की जिम्मेदारी तय किए बिना जनता पर आर्थिक बोझ डालना गलत है। इसका जनता विरोध करेगी।
*”टेंडर से पहले सरकार-प्रशासन की जवाबदेही तय हो”*
भाजपा शहर कार्यकारिणी सदस्य मनोज पारख ने कहा कि शहर पहले से ही सीवरेज और बीकेसीएल की गैरजिम्मेदाराना व्यवस्था से त्रस्त है। ऐसे अनेक बिंदु हैं जहां जनता असहाय बनी रहती है। इसलिए पूर्व के अनुभवों से सीख लेते हुए पहले सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करके ही टेंडर प्रक्रिया की जानी चाहिए।
*”जनहित के लिए नहीं, ठेकेदारों के हित में टेंडर”*
भाजपा गंगाशहर मंडल के महामंत्री गोविंद सारस्वत ने आशंका जताई कि इस प्रकार के टेंडर जनहित के लिए नहीं बल्कि ठेकेदारों के आर्थिक हित और निगम प्रशासन द्वारा समस्याओं से पल्ला झाड़ने के लिए लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक-औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने से ही समस्या का समाधान संभव है, अन्यथा यह टेंडर मात्र खानापूर्ति साबित होगा।










