समता युवा संघ का राष्ट्रीय युवा शिविर ’’अरुणोत्तम 2026’’
बीकानेर, 31 जुलाई। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्मसंघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा., उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि आदिठाणा के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026 ) के तहत राष्ट्रीय समता युवा शिविर ’’अरुणोत्तम 2026’’ शनिवार को बागड़ी मोहल्ले की छबीली घाटी के सेवा सदन में शुरू हुआ। शिविर में देश के विभिन्न इलाकों से आए करीब 425 सदस्य हिस्सा ले रहे है।
अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के तहत श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय शिविर में आचार्य प्रवर राम लालजी ने शनिवार को प्रवचन में कहा कि अपने कार्य व्यवहार में सज्जनता, शालीनता व समता भाव रखे तथा स्वभाव को निर्मल बनाएं । अच्छा व्यवहार करने वाला समता में रहने वाला ही धर्म-आध्यात्म के मार्ग पर चल सकता है। सज्जनता को जीवन में सम्मान व सत्कार मिलता है वहीं दुर्जन को दुत्कार । उन्होंने कहा कि राग द्वेष, वैर वैमनय, कषाय(काम,क्रोध,लोभ व मोह तथा अहंकार) का त्याग कर अपने आत्म स्वरूप को निर्मल बनाएं । उन्होंने कहा कि व्यक्ति की विचारधारा तीन रूप् में चलती है। नकारात्मक सोच व विचार से निराशा मिलती है। अशुभ, हिंसक व का्रेध तथा अहंकार आदि के विचारों को नहीं हटाने पर व्यक्ति को अनेक शारीरिक व मानसिक बीमारियों का सामना करता है। उन्होंने कहा युवा शक्ति कि सकारात्मक सोच व समता भावना के साथ राष्ट्र, संघ व समाज की सेवा करें।
उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने कहा कि युवा अपनी शक्ति व उर्जा का उपयोग सर्वांगीण विकास में करें। अपने में व्याप्त बुराइयों व कमियों को दूर करते हुए कार्य करें।
सेवा सदन में ही दो सत्रों में राजन मुनि ने कहा कि युवाओं का जोश व उर्जा का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र, संघ व समाज के प्रति होना चाहिए। नीरज मुनि ने कहा कि संघ का नेतृत्व के नायक को 6 गुणों से विभूषित होना चाहिए।
राष्ट्रीय कार्य समिति सभा
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ की सातवीं कार्यसमिति की सभा 2024-26 गंगाशहर मार्ग के आदिनाथ भवन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयपुर के सुमित बम्ब की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिक्रमण का संकल्प ले। प्रतिक्रमण केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्म निरीक्षण और आत्म शुद्धि की एक महान साधना है, जो हमें मन, वचन एवं काया को संयमित रखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि संवर की साधना करे, आश्रव यानि आत्मा में कर्मों के प्रवेश का रुकना उनके द्वारों को बंद करना संवर है। संवर से पापों का बंध रोका जा सकता है, ऐसा चिंतन करना संवर भावना है। युवा तत्व ज्ञान प्राप्त करें। आचार्य भगवन का सदैव यही चिंतन रहता है कि युवा केवल ज्ञानवान ही नहीं बल्कि क्रियाशील भी बनें। समता युवा संघ युवाओं के आध्यात्मिक, धार्मिक और व्यक्ति विकास के लिए अनवरत कार्य कर रहा है। जीवन के वास्तिक लक्ष्य को प्राप्त करें। समता युवा संघ सेवा और सहयोग की भावना से कार्य करें।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के मंत्री सुमित दस्साणी ने बताया कि समता युवा संघ धार्मिक संगठन होते हुए भी अपने सामाजिक उतर दायित्वों का निर्वहन बड़ी निष्ठा से कर रहा है। युवा संघ का प्रत्येक साथी पीड़ित मानवता ही नहीं जीव मात्र के उत्थान के लिए सैदव लगा है । उन्होंने संघ के व्यसन मुक्ति, जीवदया अरुणोदय आंचलिक शिविर, रक्तदान शिविर , तरुण शक्ति, अमृतम, प्रतिक्रमण कंठस्थ अभियान, सामाजिक सेवा गतिविधियां एवं संगठन सशक्तिकरण विस्तार आदि विषयों पर विस्तृत से जानकारी दी। सभा में समता युवा संघ बीकानेर के अध्यक्ष दिव्येश सुखलेचा व मंत्री अंकित बांठिया के नेतृत्व में मंगलाचरण किया गया। संघ के कोषाध्यक्ष उदयपुर के दीपन कंटालिया, राजनांद गांव के शंशांक गिरडिया, संघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री हावड़ा के संदीप पारख, पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मैसूर के अनिल पोखाड़ ने भी विचार व्यक्त किए। राजनांद गांव के सोफटवेयर इंजीनियर शशांक गिरडिया ने ए आई के उपयोग तथा साधुमार्गी से साधुमार्गी की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों ने मंगलपाठ सुना तथा सामूहिक प्रतिक्रमण आदि धार्मिक क्रियाएं की। शिविरार्थियों से साधुमार्गी जैन सेवा समिति बीकानेर के कार्यवाह अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार दस्साणी, अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, संरक्षक जयचंद लाल डागा,, चातुर्मास के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा व अन्य पदाधिकारियों ने संघ व समाज के उत्थान के लिए चर्चा की।
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन समता युवा संघ के मंत्री सुमित दस्साणी ने बताया कि दो दिवसीय शिविर के अंतिम दिन रविवार को प्रार्थना, समता शाखा और सामामृतम् ध्यान, प्रवचन, चरित्र आत्माओं का तीसरा सत्र, प्रवचन, आदि कार्यक्रम होंगे। दोपहर को एक बजे से पौने दो बजे तक आदिनाथ भवन में समापन सत्र होगा।



























