
84 कहानियों में राजस्थानी भाषा की मिठास और लोक जीवन का प्रतिबिंब
बीकानेर। बीकानेर के महाराजा नरेंद्र सिंह सभागार में राजस्थानी भाषा के भाषा विशेषज्ञ डॉ. नमामी शंकर आचार्य के लघु कथा संग्रह _”उत्तर पातार – जैसे को तैसा”_ का लोकार्पण किया गया।
इस संग्रह में राजस्थानी भाषा में कुल 84 लघु कथाएं शामिल हैं। डॉ. आचार्य ने पुस्तक में राजस्थानी भाषा के मानदंड तय करते हुए उन मूल शब्दों, कहावतों और लोकोक्तियों का प्रयोग किया है जिनसे राजस्थानी भाषा की पहचान बनती है। कई कहानियों में लोक जीवन, रीति-रिवाज, सामाजिक विसंगतियों के साथ बाल मनोविज्ञान और सामाजिक-मानसिक स्थितियों को भी उजागर किया गया है।
पुस्तक की विश्लेषणात्मक भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार श्री संजय पुरोहित ने लिखी है। इसमें पुस्तक के विषय और उद्देश्य को सामान्य पाठक के लिए सरलता से समझाया गया है। पुस्तक का मुद्रण बीकानेर के ज्योति प्रकाशन से हुआ है। उल्लेखनीय है कि डॉ. नमामी शंकर आचार्य राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की पत्रिका _”जागती जोत”_ का संपादन भी कर चुके हैं।
पाठकों का मानना है कि लघु आकार की प्रत्येक कहानी में विशाल भाव और संवेदना का कैनवास है। पुस्तक पढ़ने के बाद हर कहानी पर चिंतन के लिए अवकाश की मांग होती है।
इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों ने डॉ. आचार्य से आग्रह किया कि वे भविष्य में लघु कथा के स्थान पर पूर्ण कहानी संग्रह या उपन्यास लिखें, ताकि पाठक राजस्थानी भाषा और संस्कृति के साथ अधिक समय तक जुड़ सके।
कार्यक्रम में डॉ. आचार्य ने अपनी इस कृति की प्रति साहित्यकारों और पाठकों को ससम्मान भेंट की।













