
बीकानेर, 7 अगस्त। विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 के समापन अवसर पर शुक्रवार को डॉ. श्याम अग्रवाल चिल्ड्रन हॉस्पिटल में स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नई माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व, सही तकनीक तथा इसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी गई। इस दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, सम्मान समारोह और विशेषज्ञों के व्याख्यान भी आयोजित किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ. अल्का डोली पाठक ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मधु खत्री, नवोदित दंत चिकित्सक डॉ. सोनम राय, डॉ. आकांक्षा अग्रवाल, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल तथा वरिष्ठ पत्रकार शिव कुमार सोनी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. श्याम अग्रवाल ने कहा कि जन्म से छह माह तक शिशु के लिए केवल मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। इस अवधि में किसी भी प्रकार के पूरक आहार या सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने बताया कि स्तनपान से बच्चों में संक्रमण, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य मेटाबॉलिक रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
डॉ. आकांक्षा अग्रवाल ने कहा कि स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं डिम्बग्रंथि (ओवरी) के कैंसर का जोखिम कम होता है। साथ ही मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की संभावना भी घटती है।
डॉ. मधु खत्री ने कहा कि स्तनपान कराने वाली प्रत्येक महिला को परिवार और समाज का सम्मान तथा पूरा सहयोग मिलना चाहिए। वहीं डॉ. अल्का डोली पाठक ने कहा कि बच्चों को स्वस्थ रखने में केवल चिकित्सकों की ही नहीं, बल्कि माता-पिता की स्वस्थ जीवनशैली की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डॉ. सोनम राय ने बच्चों की समय पर देखभाल और ओरल हाइजीन के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में दीपिका ने सबसे तेज एवं सही उत्तर देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्हें सम्मानित किया गया तथा उन्होंने सभी माताओं को स्तनपान जारी रखने की शपथ भी दिलाई।
विशेषज्ञों ने बताया कि छह माह की आयु के बाद स्तनपान के साथ पूरक आहार जैसे दाल-चावल, दलिया, खिचड़ी, रोटी और दही शुरू किया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि एक वर्ष की आयु से पहले शिशु को गाय-भैंस का दूध, फॉर्मूला मिल्क अथवा चाय नहीं दी जानी चाहिए तथा शिशु के आहार से जुड़ा हर निर्णय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।
समापन अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कुमार सोनी ने कहा कि स्तनपान जागरूकता केवल एक सप्ताह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञों, पैरामेडिकल स्टाफ और परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाना होगा।
कार्यक्रम का समापन “मां का दूध सर्वोत्तम है, यह अमृत है” के संदेश के साथ किया गया।























