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वरिष्ठ पत्रकार संपादक कवि रंग कर्मी रंग निर्देशक  साहित्यकार के सृजन का परिस्दृश्य का सुनहेरा सितारा अस्त

रजनी रमण शर्मा  बीकनेर का निधन

रजनी रमण शर्मा ने
जब लिखना शुरू किया तो कविता, कहानी, समीक्षा और आलेख में उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाने लगा। जब रंगकर्म में उतरे तो निर्देशन और अभिनय में इतनी महारथ हासिल किया कि विशेषज्ञों की श्रेणी में आ गए। पत्रकारिता में उतरे तो प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक छा गए। पौराणिक श्रृंगार में देशकाल की इतनी समझ कि उनके द्वारा किए गए श्रृंगार में वह काल जाग उठता था। संगठन चलाने में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान छोड़ गए । ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी और इंदौर जलेस के सबसे लम्बे समय तक अध्यक्ष रहे रजनी रमण शर्मा जी बात करे तो सृजन में रचे-बसे उस व्यक्तित्व की, जिनके बनाए रास्ते पर आज नई पीढ़ी चल रही है*।

साहित्य, रंगकर्म और जन-चेतना निर्माण के लिए अनवरत प्रयासरत रहे रजनी रमण शर्मा का निधन बुधवार 26 अगस्त 2026 को सुबह उनके गृह जनपद बीकानेर (राजस्थान) में हो गया। रजनी रमण शर्मा कला, विचार और सृजन के कई मोर्चों पर सक्रिय थे। उन्होंने कई नाटकों में काम किया था और कई नाटकों का कुशल निर्देशन भी किया था। शम्बूक की हत्या, घासीराम कोतवाल, मशीन, जुलूस, पूस की एक रात, सुन लड़की, थैंक्यू मिस्टर ग्लाड, हम रोशनी बांटते हैं, दबे पाँव आते हैं सभी मौसम, अंधेर नगरी, मेघदूत और हाउस ऑफ़ मैड जैसे नाटकों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया था। उन्हें कई बार श्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान भी मिला था। अल्काजी और अफसर हुसैन जैसे निर्देशकों के साथ काम कर चुके रजनी रमण शर्मा ने नृत्य नाटिका मेघदूत, श्रीकृष्ण पारिजातम और टोडो राव आदि का निर्देशन किया था। वे नाट्य लेखन, अभिनय, रंग तकनीक, मंच सज्जा आदि में कुशल थे। उनके योगदान के लिए उन्हें राजस्थान संगीत नाटक अकादमी ने पुरस्कृत भी किया था। रंगकर्म के प्रति उनकी लगन प्रेरणादायक थी और रहेगी।

     अपने उपन्यास ‘तुम्हारे आस पास’ के लिए ख्यात रजनी रमण शर्मा हिंदी और ब्रजभाषा में कविताएँ भी लिखते थे। आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों से उनकी रचनाएँ प्रसारित होती रहीं। राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश राज्यों की साहित्य अकादमियों में सक्रिय रहे रजनी रमण अपने बेहतरीन संचालन के लिए भी जाने गए।

     जनवादी लेखक संघ से लंबे समय से जुड़े रहे रजनी रमण शर्मा राज्य की इंदौर इकाई के अध्यक्ष थे। उन्होंने नियमित कार्यक्रम कराए और मासिक रचनापाठ का अनवरत सिलसिला चलाया। इस सक्रियता के कारण यहाँ की जलेस इकाई उल्लेखनीय बनती गई।

रजनी रमण शर्मा पौराणिक श्रृंगार के सिद्धहस्त कलाकार -* पौराणिक श्रृंगार में देश-काल की उनकी इतनी गहरी समझ थी कि उनके द्वारा किए गए श्रृंगार में वह काल स्वयं जाग उठता था। बीकानेर में जन्माष्टमी पर उनके द्वारा बनाई गई *पुरस्कृत  सर्वशेष्ठ झांकियां* पूरे शहर में अत्यंत प्रसिद्ध रही हैं और उन्हें आज भी लोग याद करते हैं। यह जानकारी उनके अनुज भ्राता  रामावतार शर्मा ने दी ।
रजनी रमण शर्मा की अंतिम यात्रा मैं साहित्यकार रंग कर्मी पत्रकार एवम शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे प्रतिभा के धनी रजनी रमण शर्मा को ग़मगिन आँखो से विदाई व विनम्र श्रद्धांजलि दी

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Gordhan Soni

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