बीकानेर, 02 सितम्बर। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास ’’समर्पण 2026 के सान्निध्य छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में 4 सितम्बर को होने वाली ं भागवती दीक्षा महोत्सव के लिए चार मुमुक्षुओं व उनके करीब 800 परिजन बुधवार को बीकानेर पहुंच गए है।
साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि बैंगलुरू के मुमुक्ष नव रतन कोठारी, पाली के शुभम श्रीश्रीमाल, गातापार (धमतरी) की मुमुक्षु सुश्री काजल नाहर, सूरत की मुमुक्षु दिया सुराणा के परिजनों को बीकानेर, गंगाशहर के अनेक स्थानों पर ठहराया गया है। मुमुक्षुओं के ठहरने के स्थल पर मांगलिक दीक्षा के गीत गाए जा रहे है तथा उनके परिजन विभिन्न तरह के जाप, सामायिक व दीक्षार्थी के श्रेष्ठ संयम पालना की साधना के लिए मंगलकामनाएं कर रहे है। मुमुक्षु व उनके परिजनों के आवास, प्रवास, परिवहन आदि की व्यवस्था अलग-अलग स्थानों पर की गई है।
साधुमार्गी जैन सेवा समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी व अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया 3 सितम्बर गुरुवार को सुबह सवा आठ बजे कोठारी मोहल्ले के समता कुंज से भव्य संयम अनुमोदना यात्रा निकलेगी। इसमें मुमुक्षु व उनके परिजन, साधुमार्गी जैन संघ के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य तथा श्रावक-श्राविकाएं हिस्सा लेगी। जो विभिन्न जैन बहुल्य मोहल्लों से होते हुए छबीली घाटी के सेवा सदन पहुंचेगी। इसी दिन आदिनाथ भवन में दोपहर दो बजे ओघा बंधाई रस्म होगी, जिसमें मुमुक्षुओं को उसके परिजन पांच महाव्रत के साथ संयम पालन की सामग्री प्रदान करेंगे। शाम चार बजे आदिनाथ भवन में ही श्री साधुमार्गी सेवा समिति व उनके परिजनों की ओर से मुमुक्षुओं व उनके वीर माता पिता का अभिनंदन किया जाएगा। मुमुक्षुओं का मुंडन संस्कार 4 सितम्बर को सुबह सवा पांच बजे आदिनाथ भवन में व दीक्षा सुबह सवा आठ बजे छबीली घाटी के सेवा सदन में होगी।
सामूहिक 9 दिनों की तपस्याएं, 7 से 15 सितम्बर तक
अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय व स्थानीय साधुमार्गी सेवा समिति के मंत्री सुरेश बच्छावत ने बताया कि आचार्यश्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि में पर्युषण पर्व के दौरान 7 से 15 सितम्बर तक बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं बीकानेर व देश के विभिन्न इलाकों में मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में होगी। श्रावक श्राविकाएं तपस्या के दौरान आहार के रूप् में केवल सीमित उबले हुए जल का उपयोग करेंगे तथा स्वाध्याय, जाप व सामायिक आदि की साधना करेंगे। साधुमार्गी जैन संघ अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि तपस्याओं के प्रति श्रावक-श्राविकाओं में विशेष उत्साह है। तपस्याएं संवत्सरी महापर्व के दिन 15 सितम्बर तक रहेगी।
साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि बैंगलुरू के मुमुक्ष नव रतन कोठारी, पाली के शुभम श्रीश्रीमाल, गातापार (धमतरी) की मुमुक्षु सुश्री काजल नाहर, सूरत की मुमुक्षु दिया सुराणा के परिजनों को बीकानेर, गंगाशहर के अनेक स्थानों पर ठहराया गया है। मुमुक्षुओं के ठहरने के स्थल पर मांगलिक दीक्षा के गीत गाए जा रहे है तथा उनके परिजन विभिन्न तरह के जाप, सामायिक व दीक्षार्थी के श्रेष्ठ संयम पालना की साधना के लिए मंगलकामनाएं कर रहे है। मुमुक्षु व उनके परिजनों के आवास, प्रवास, परिवहन आदि की व्यवस्था अलग-अलग स्थानों पर की गई है।
साधुमार्गी जैन सेवा समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी व अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया 3 सितम्बर गुरुवार को सुबह सवा आठ बजे कोठारी मोहल्ले के समता कुंज से भव्य संयम अनुमोदना यात्रा निकलेगी। इसमें मुमुक्षु व उनके परिजन, साधुमार्गी जैन संघ के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य तथा श्रावक-श्राविकाएं हिस्सा लेगी। जो विभिन्न जैन बहुल्य मोहल्लों से होते हुए छबीली घाटी के सेवा सदन पहुंचेगी। इसी दिन आदिनाथ भवन में दोपहर दो बजे ओघा बंधाई रस्म होगी, जिसमें मुमुक्षुओं को उसके परिजन पांच महाव्रत के साथ संयम पालन की सामग्री प्रदान करेंगे। शाम चार बजे आदिनाथ भवन में ही श्री साधुमार्गी सेवा समिति व उनके परिजनों की ओर से मुमुक्षुओं व उनके वीर माता पिता का अभिनंदन किया जाएगा। मुमुक्षुओं का मुंडन संस्कार 4 सितम्बर को सुबह सवा पांच बजे आदिनाथ भवन में व दीक्षा सुबह सवा आठ बजे छबीली घाटी के सेवा सदन में होगी।
सामूहिक 9 दिनों की तपस्याएं, 7 से 15 सितम्बर तक
अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय व स्थानीय साधुमार्गी सेवा समिति के मंत्री सुरेश बच्छावत ने बताया कि आचार्यश्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि में पर्युषण पर्व के दौरान 7 से 15 सितम्बर तक बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं बीकानेर व देश के विभिन्न इलाकों में मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में होगी। श्रावक श्राविकाएं तपस्या के दौरान आहार के रूप् में केवल सीमित उबले हुए जल का उपयोग करेंगे तथा स्वाध्याय, जाप व सामायिक आदि की साधना करेंगे। साधुमार्गी जैन संघ अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि तपस्याओं के प्रति श्रावक-श्राविकाओं में विशेष उत्साह है। तपस्याएं संवत्सरी महापर्व के दिन 15 सितम्बर तक रहेगी।













