रामायण के 42वें दिन प्रदोष काल में भगवान शंकर की विशेष पूजा, अभिषेक ढाई घंटे तक चला
नोखा में चल रही वाल्मीकि रामायण के 42वें दिन प्रदोष काल में भगवान शंकर की विशेष पूजा, अभिषेक ढाई घंटे तक चला।
नोखा। यहाँ लोहाटी चौक हनुमान मंदिर के समीप अयोध्या धाम में चातुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से चातुर्मास परम पूज्य दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज के श्री मुख से श्री वाल्मीकि रामायण में मंगलवार 8 सितम्बर को 42वें दिन युद्ध कांड को आगे बढ़ाते हुए सुग्रीव बिना किसी से पूछे रावण को समझाने और सीता को वापस लौटाने हेतु लंका गए और रावण का मानने का तो कोई सोच ही नहीं सकते। जब सुग्रीव सुरक्षित वापस लौट आते हैं तब भगवान राम उन्हें कहते हैं कि आपने यह दुस्साहस किया है, आपको कुछ हो जाता तो। भविष्य में ऐसा दुस्साहस ना करें।
भगवान राम अपने सभी को कहते हैं कि अब शुभ मुहूर्त में लंका पर आक्रमण कर देना चाहिए। सभी द्वारों पर युद्ध की तैयारियों के लिए मुख्य-मुख्य योद्धाओं को तैनात कर दिया। फिर भी भगवान राम ने रावण को एक मौका और देते हुए अंगद को रावण के पास भेजा तो अंगद ने रावण से कहा कि सीता को लेकर भगवान राम की शरण में चले जाओ और अपने प्राण बचा लो। लेकिन रावण क्रोधित होते हुए अपने राक्षसों को कहते हैं इसे पकड़ो और मार दो, लेकिन रावण द्वारा भेजे गए 4 राक्षसों को अंगद ने आकाश में पहुँचा दिया। सारी लंका को वानरों ने घेर लिया। जब रावण को पता चला तो उसने अपनी सुरक्षा को दो गुना बढ़ा दिया और युद्ध प्रारंभ हो गया। मंगलवार को कथा को करीब 40 मिनट पहले सम्पन्न करते हुए प्रदोष काल में करीब ढाई घंटे तक भगवान शंकर की विधिविधान से विशेष पूजा अर्चना और अभिषेक दंडी स्वामी ब्रह्मानंद महाराज के सानिध्य में हुआ। समिति के इन्द्रचन्द मोदी द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया कि दामोदर तिवाड़ी, प्रहलाद मोहता, नारायण राठी, पवन चांडक, रमेश मालानी, जुगल लोहिया, गिरधारी पारीक आदि व्यवस्था सम्भाल रहे हैं।



















