नोखा । यहाँ लोहाटी चौक में चतुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से चल रही श्री वाल्मीकि रामायण के 44वें दिन गुरुवार 10 सितम्बर को व्यास पीठ पर विराजित परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि जैसे शरीर के लिए आहार का होना आवश्यक है वैसे ही अपने जीवन के कल्याण के लिए भगवान का भजन, सत्संग आवश्यक है। भगवान के जितने भी नाम हैं आपके कल्याण करने वाले हैं। भगवान के नाम से, ध्यान से, संकीर्तन से जुड़ जाओ लेकिन तन्मय होकर जुड़ना चाहिए तो आपका जीवन सफल व कल्याण हो जाएगा। कल बुधवार को युद्ध कांड की कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराजश्री ने कहा कि बड़ी मुश्किल से कुंभकरण को नींद से जगाया गया। कुंभकरण ने अपने बड़े भाई रावण से कहा कि भैया तुमने सीता हरण जैसा बहुत बड़ा गलत कार्य किया है, उसका दंड तो भुगतना ही पड़ेगा। भाभी मंदोदरी सहित सभी ने आपको समझाया लेकिन आप नहीं माने। कुंभकरण जैसा राक्षस भी रावण को कहता है कि तुम अपने चाटुकारों और प्रशंसा करने वालों की बातों में आकर अंधे हो गये हो, ऐसे चाटुकारों को निकाल देना चाहिए। कुंभकरण रावण को कटु शब्द कहने पर रावण कहता है कि तुम्हें भाषण देने के लिए नहीं जगाया। मैंने माना कि सीता को हरण करके लाना गलत हो गया, लेकिन वो बीत गया जो बीत गया। लेकिन तुम अब इसका समाधान करो और युद्ध करो। तब जाकर कुंभकरण अपने बड़े भैया रावण से कहता है कि अब तुम चिंता मत करो, मैं आपके साथ हूँ और राम का सिर काटकर आपको दूंगा। जब तक मेरे शरीर में जान है आपका बाल भी बांका नहीं होगा। केवल राम का ही नहीं, हनुमान, सुग्रीव आदि सभी को मार दूंगा। जब कुंभकरण युद्ध के लिए रवाना होता है तो उसका बायाँ अंग (हाथ) फड़कने लगता है, यह बड़ा अपशकुन होता है। रावण ने भाई कुंभकरण को माला पहनाते हुए गले लगाया है। कुंभकरण के थप्पड़ से 8700 वानर मारे गये और हनुमानजी सहित पांच वीरों को भी अधमरा कर दिया। अंगद ने कुंभकरण को थप्पड़ मारकर अचेत कर दिया, कुंभकरण ने सुग्रीव को मारकर अचेत कर दिया। सुग्रीवजी ने कुंभकरण के नाक, कान को काट दिया। श्री राम ने कुंभकरण को मार कर उसका कल्याण कर दिया तो देवताओं ने खुशियां मनाईं।
कुंभकरण के मरने की सूचना रावण को मिली तो वो बोखलाया और कहा कि मेरी भुजा ही कट गयी। रावण के चारों पुत्रों ने कहा आप चिंता मत करो, हम युद्ध करेंगे। समिति के इन्द्रचन्द मोदी ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि गिरधारी पारीक, नारायण राठी, पवन चांडक आदि व्यवस्थाओं पर नजर रख रहे हैं।

















