बीकानेर, 15 सितम्बर। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास ’’समर्पण 2026 के तहत पर्युषण के अंतिम दिन संवत्सरि महापर्व पर सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध व्रत, एकासना, उपवास सहित अनेक तपस्याएं की। बुधवार को सुबह सवा छह बजे छबीली घाटी के सेवा सदन में चारित्र आत्माओं के सान्निध्य में सामूहिक क्षमापना का आयोजन होगा।
क्या है पौषध व्रत-चारित्र आत्माओं के कथनानुसार श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया कि पौषध गृहस्थ व्रत और साधना है, जिसमें श्रावक-श्राविकाएं कुछ समय या पूरे दिन मुनि-साध्वी (संत) जैसी संयमपूर्ण दिनचर्या का पालन करते है। सांसारिक मोह-माया और कार्य व्यवहार और आरंभ (घर-गृहस्थी के काम-काज) का त्याग करते है, नए कर्मों के बंधन को रोकना (संवर) और पुराने कर्मों की निर्जरा, आत्म शुद्धि शुद्धि के लिए मन, वचन और शरीर को पवित्र करके आत्म चिंतन और स्वाध्याय करते है। आहार का संयम रखते है तथा उपवास (निराहार) सहित विभिन्न तपस्याएं करते है। पौषध व्रत साधक घर के कामकाज, व्यापार, धन सम्पति की चिंता और हिंसा करने वाले कायों से पूरी तरह दूर रहते, श्रृंगार, भोग विलासिता, मनोरंजन और संसारिक सुख सुविधओं का त्याग करते है, दिन भर धार्मिक क्रियाएं यथा देव वंदन, सामायिक, प्रतिक्रमण, गुरु वंदना और धार्मिक ग्रंथों के स्वाध्याय में बीताते है। सूर्यास्त के बाद पानी तक का त्याग करता है ।
तीर्थंकर परमात्मा के संदेश-वचनों के अनुसार जीवन जीए-आचार्य श्री रामलालजी म.सा. ने मंगलवार को छबीली घाटी के सेवा सदन में प्रवचन में कहा कि प्रत्येक श्रावक-श्राविका का जीवन तीर्थंकर परमात्मा व महापुरुषों के संदेशों व वचनों के अनुसार होना चाहिए। जीवन का कार्य, व्यवहार, मर्यादा की पालना के साथ जिनेश्वर परमात्मा की साधना, आराधना व भक्ति गर्व से होनी चाहिए । जैन संस्कार, धार्मिक क्रियाएं व दिनचर्या, पांच महाव्रतों की पालना, समता, शांति साधना अंतर मन से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में मैत्री भावों का विकास करें, इसमें आने वाले अवरोधों को ढूंढकर निकालने का प्रयास करे। दुश्मनी को मैत्री भाव में परिवर्तित करें। क्षमा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि क्षमा याचना के पश्चात मन हल्का हो तथा समस्त जीवों के प्रति मैत्री भाव रहे। भगवान महावीर स्वामी सहित तीर्थंकर परमात्मा के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करते हुए आत्म कल्याण के मार्ग पर चलें।
उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने कहा कि अहिंसा व मैत्री भावनाओं को अंतरमन तक पहुंचाना, सभी जीवों के प्रति मैत्री, सदैव सदगुणों की चर्चा की भावना को पाराकाष्ठा तक पहुंचाएं। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरि महापर्व पर किसी के दुर्गणों की चर्चा, किसी का मन, वचन व कर्म से बुरा नहीं करने, का दृढ संकल्प लें। स्वयं व घर, परिवार, समाज व सकल संसार में अहिंसा, करुणा, दया व मैत्री भावना को भरने से सर्व का मंगल तथा प्रत्येक जीव का जीवन सुखमय होगा।
अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ तथा श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मंत्री सुरेश बछावत ने संघ की ओर से उपस्थित चारित्र आत्माओं से क्षमा याचना की । उन्होंने बताया कि मधुर मुनि ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन विवेचन किया तथा कहा कि किसी से अनबन व मन मुटाव हो गया हो तो सरल हृदय के साथ क्षमा याचना करें। लाघव मुनि, सौरभ मुनि, गगन मुनि ने क्षमा मैत्री के महत्व तथा महा पुरुषों के दिव्य गुणों को बताया। साध्वी लब्धी श्रीजी ने कहा कि क्रोध को क्षमा से, मान को नम्रता से तथा माया को सरलता से तथा लोभ को संतोष से जीते।
उपस्थितजनों की ओर से क्षमापना-
श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति के कार्याध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी ने उपस्थित करीब तीन हजार से अधिक श्रावक-श्राविकाओं, समता युवा संघ, साधुमार्गी जैन महिला मंडल व समता बहु मंडल की ओर से आचार्यश्री, उपाध्याय प्रवर तथा समस्त चारित्र आत्माओं से क्षमा याचना की। दस्साणी ने साधुमार्गी श्रावक संकल्प पत्र का वाचन करते हुए कहा कि उपस्थित सभी साधुमार्गी श्रमणोपासक है। तीर्थंकर भगवन्तों द्वारा प्ररूपित द्वादशांगी पर सभी की सम्पूर्ण आस्था है। सभी श्रावक-श्राविकाओं ग्रहित व्रत-नियम की शुद्ध आराधना के लिए ं अंतःकरण से तत्पर है। सभी जन आचार्य भगवन की ओर से श्रावकों के लिए फरमाए गए प्रत्येक आज्ञा एव निर्देश ं के पालना के लिए सर्वतोभावेन समर्पित है। सभी श्रावक-श्राविकाएं संघ की रीति, नीति, नियम-मर्यादाओं का पालन करने के लिए कटिबद्ध है। संघ के सभी साधु-साध्वियों के प्रति समस्त श्रावक-श्राविकाओं की आंतरिक भक्ति है, वे सभी चारित्र आत्माएं अनेक सद्गुणों से संपन्न है, सभी उनकी यथा शक्ति पर्युपासना की भावना रखते है। छदमस्थतावश किसी से कोई स्खलना होने पर विनय पूर्वक निवेदन करने के भाव रखते है । सभी श्रावक-श्राविकाएं वर्तमान शासनेश की धारणाओं एवं मान्यताओं पर हृदय से आस्था व्यक्त करते है तथा उन्हीं के अनुसार धार्मिक क्रियाएं करने के संकल्प को दोहराते है। इसी तरह का संकल्प उपस्थित मुनि व साध्वीवृंद ने आचार्यश्री व उपाध्याय प्रवर के समक्ष सामूहिक रूप् से किया।
रिकार्ड तपस्याएं-आचार्यश्री रामलालजी व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि व अन्य चारित्र आत्माओं के चातुर्मास समर्पण 2026 में बीकानेर अंचल ही नहीं देश में साधुमार्गी जैन संघ के साधु-साध्वियों व श्रावक-श्राविकाओं ने रिकार्ड तपस्याएं की है। साधुमार्गी जैन संघ के अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा व साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि बीकानेर में साध्वी राम तरु, साध्वी राम ज्योति, साध्वी राम दिशा, साध्वी इतिश्री, रामपुलकित मुनि ने 15 से 31 दिन की तपस्याएं की है। श्राविकाओं में मास खमण (एक माह) की तपस्या करने वालों में सरला देवी पारख, सिद्धार्थ बांठिया, नीलम बुच्चा, सुशीला बुच्चा तथा कई गुप्त तपस्याएं करने वाले शामिल है। उन्होंने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान ’’एक नई उमंग, एक नया संकल्प के साथ सामूहिक 9 की तपस्या की लड़ी में भी 7 से 15 सितम्बर तक सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। इनमें संघ के राष्ट्रीय मंत्री सुरेश बच्छावत, साधुमार्गी जैन सेवा समिति के सहमंत्री नवीन कोठारी, मनीषा छाजेड़ व उनकी पुत्री मीनल छाजेड़ (मां-बेटी) शामिल है। इसके अलावा, उपवास, एकासना, एकल ठाणा, आयम्बिल, बेला, तेला, एक से लेकर 15 तक की तपस्याएं करने वाले श्रावक-श्राविकाओं की संख्या भी 500 से अधिक है।














