नोखा/ यहाँ लाहोटी चौक हनुमान मंदिर के समीप अयोध्या धाम में चातुर्मास संघ समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से चल रही श्री वाल्मीकि रामायण कथा के 49 वें दिन मंगलवार को व्यास पीठ पर विराजित दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने रावण की मृत्यु के बाद हनुमानजी को सीता का हाल जानने के लिए लंका भेजते हैं। हनुमानजी वापस लौट कर भगवान रामजी को मां सीता का संदेश सुनाते हुए कहते हैं कि मां सीता आपके विरह के कारण चिंतित और मुरझाई हुई हैं आपकी प्रतीक्षा कर रही हैं। यह सुन एकबार तो रामजी उदास हो जाते हैं और सोचने लग गये कि अब मैं सीता को सीधा कैसे लाऊं, सीता इतने समय से रावण के भवन में रही मैं तो जानता हूँ कि सीता पवित्र और निष्कलंक है लेकिन दूसरे नाना प्रकार की बाते करके क्या-क्या कहेंगे। रामजी सोचते हैं कि सीता के लिए कठोरता का पालन करते हुए अग्नि परीक्षा का नाटक करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा मैं ऐसा नहीं करूँगा तो सीता पर कलंक लग जायेगा। यह सब जानकर मां सीता भगवान राम का नाम लेकर चिता रूपी अग्नि की परिक्रमा कर अग्नि में प्रवेश कर जाती हैं तो आसमान से सभी देवी देवता नीचे आये और भगवान राम से कहते हैं कि हम सब साक्षी हैं सीता पवित्र एंव निष्कलंक हैं इतने में अग्नि देव सीता को अपनी गोद में लेकर प्रकट हो जाते हैं और राम से कहते हैं कि हम राजपुरोहित हैं आपको आदेश देते हैं कि यह जनकजननी सीता पवित्र निष्कलंक है इसे आप स्वीकार करो। भगवान राम को संसार के लोगों को कुछ कहने सुनने का मौका नहीं मिले इसलिए यह नाटक करना पड़ा। भगवान रामजी पुष्पक विमान से सीता, सुग्रीव, लक्ष्मण, विभीषण, हनुमान सहित सभी को साथ लेकर अयोध्या आगये इससे पूर्व हनुमानजी को आने की सूचना देने के लिए भेजा तो अयोध्या को खूब सजाया संवारा गया और स्वागत की तैयारियाँ की गईं। अयोध्या में भगवान राम सीता सबका भव्य स्वागत किया गया रामजी ने भरत को गले लगाया और माताओं ने सीता को गले लगाया और सीता को सजाया गया। भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ आकाश से देवताओं ने पुष्प वर्षा की। समिति के इन्द्रचन्द मोदी ने प्रेसनोट जारी करके बताया कि समिति के प्रहलाद मोहता, दामोदर तिवाड़ी, गिरधारी पारीक, जुगल लोहिया, नारायण राठी, पवन चांडक सहित कार्यकर्ता व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं कथा के बाद प्रसाद वितरण किया जाता हैं।















