


बीकानेर, 25 सितम्बर। सूचना एवं जन संपर्क विभाग के सेवा निवृत सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद जोशी ने पत्नी के निधन पर सुहागन भागन के रूप में दुल्हन का श्रृंगार कर स्वयं दूल्हे का सा वेश धारण कर शुक्रवार को गंगाशहर के श्मशान में नम आखों से अंतिम विदाई । जोशी ने सुखद आत्मीय स्नेह भाव के साथ बिताए 42 वर्षों वैवाहिक जीवन के यादगार पलों का जिक्र करने पर सभी मिलने वाले भावुक हो रहे थे।
जोशी की पत्नी श्रीमती अमिता जोशी…का निधन 63 वर्ष की आयु में गुरुवार रात को कुछ समय पूर्व हुई गुर्दें की बीमारी के कारण निधन हो गया था। शुक्रवार को गंगाशहर के बाफना स्कूल के सामने की गली से गाजे-बाजे के साथ मोक्षधाम ले जाकर अंत्येष्टि की गई। बैंड पार्टी रामनाम संकीर्तन के साथ ’’जिन्दगी की सफर में गुजर जाते है वो लोग फिर नहीं आते’’, तथा ’’ अभी ना जाओ छोड़ कर दिल अभी भरा नहीं’’ आदि विदाई के गीतों के मुखड़े बजाकर गमगीन ब वियोग से व्याकुल वातावरण बना रहे थे। घर से श्मशान मार्ग तक अनेक लोगों ने बैंड बाजे के साथ अपनी पत्नी को दी गई विदाई का नजारा देखा तथा भावुक होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी वहीं पति-पत्नी के प्रेम व विदाई के प्रसंग की चर्चा करते हुए नमन किया।
पौढ़ी गढ़वाल के मूल निवासी , बीकानेरवासी (गौड़ ब्राह्मण) जोशी ने बताया कि श्रीनगर उतराखंड से 18 फरवरी 1984 को अमिता जोशी..परिण्य सूत्र में बंधकर बीकानेर आर्इ्र। करीब 42 वर्षों तक धर्म पारायण, श्रेष्ठ पत्नी का धर्म निभाया, हंसमुख व मिलनसार व्यक्तिव के साथ पारिवारिक व सामाजिक धर्म बखूबी निभाया। वो दो पुत्र, दो पोत्र एवं एक पौत्री का भरा पूरा परिवार छोड़कर विदा हो गई। उनकी बातें, आत्मीय रिश्तों को भूला पाना बहुत कठिन होगा। जोशी को पूर्व सूचना एवं संपर्क अधिकारी अमर सिंह चौहान, स्वतंत्र पत्रकार रतन सिंह रघुवंशी सहित अनेक सूचना एवं जन संपर्क विभाग के पूर्व कार्मिकों और आस पड़ौस के लोगों व रिश्तेदारों ने पत्नी के वियोग के समय पर ढाढस बंधाया तथा उनके दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
आदरणीय जोशी जी,
पत्नी की मृत्यु का दुख जीवन के सबसे बड़े और गहरे आघातों में से एक है, जिससे उबरने में लंबा समय और मानसिक संबल की आवश्यकता होती है।दुख से निपटने के उपायभावनाओं को दबाएं नहीं: रोना या गुस्सा आना इस प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है; इन्हें बाहर आने दें।खुद को समय दें: घाव भरने में समय लगता है, इसलिए खुद पर जल्दबाजी करने का दबाव न डालें।सहारा लें: अपने परिवार, करीबी दोस्तों या जीवनसाथी के निधन के दुख से कैसे निपटें जैसी सहायता समूहों से बात करें।यादों को सम्मान दें: पत्नी की अच्छी यादों और उनके अच्छे गुणों को अपने जीवन में जीवित रखें। मैने मेरी पत्नी लक्ष्मी को 25.11.2022 खोया था। पत्नी की आवश्यकता जवानों और बुढ़ापे में अधिक रहती हैं। राजस्थानी कहावत हैं मत मारियो बच्चे की मां ओर बूढ़े की नार। अपने आपको संभाले। जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित हैं। अपने को मेरी तरह व्यस्त, मस्त और स्वस्थ रखे। प्रभु का नाम ले। दान पुण्य करे। धर्म अध्यात्म की पुस्तके, वास्टसअप पर आत्म सम्बल प्रदान करने वाले संदेश पढ़े। कुछ समय अपने पोते पोती, परिजनों और यार दोस्तो तथा परोपकारी कार्यों में दे। ॐ शांति ॐ शांति ॐ शान्ति।
शिव कुमार सोनी वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, सांस्कृतिक संवाददाता राजस्थान पत्रिका, बीकानेर
वर्तमान बीकानेर लाइव न्यूज़ पेपर और न्यूज पोर्टल मुख्य संपादक।














