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वैरागी-संत अपने तर्पण श्राद्ध जीते जी कर लेते हैं,


मां नीं भूल सकूं थांरो प्यार, रियोडो़ दुलार …

श्रद्धा से श्राद्ध मनाओ तो जानूं,

बड़ा ही गहरा ज़हर भरा, मन आत्मा पर…

बड़े सलीके से लबों को खोलना,…

राष्ट्रीय कवि चौपाल 588 वीं कड़ी “श्राद्ध में श्रृद्धा… किस संदर्भ में उचित…? किस परिप्रेक्ष्य में अनुचित… ?”  विषय को समर्पित रही आज के कार्यक्रम अध्यक्षता में डॉ हरिदास हर्ष, मुख्य अतिथि में डॉ अखिलानंद पाठक विशिष्ट अतिथि में सरोज भाटी एवं सरदार अली परिहार आदि मंच सुशोभित हुए..  कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि श्राद्ध केवल भोज तक सीमित है तो मुक्ति हो संदेह नहीं असंभव ही है!  वैरागी, संत अपने तर्पण श्राद्ध पहले ही कर लेते हैं, खेद ही तो है स्व मुक्ति के लिए पराधीन होना
        डॉ हरिदास हर्ष ने अध्यक्षीय उद्बोधन श्राद्ध की महत्ता पर बारिकियों से रहस्य को सहजता में बताया काव्य में..  मां नीं भूल सकूं थांरो प्यार, रियोडो़ दुलार … मुख्य अतिथि डॉ अखिलानंद पाठक ने श्राद्ध की भ्रांतियों की ग्रंथियों को सुलझाने में अपनी शास्त्रोक्त प्रमाण से सभी का मन मोह लिया,.. श्रद्धा से श्राद्ध मनाओ तो जानूं, जीते जी अपनो अपनाओं तो जानूं विशिष्ट अतिथि सरोज भाटी ने ऊंची ऊंची अट्टालिका , मंदिर दिया है नाम, आरती पूजा अर्चना….  सरदार अली परिहार :  सबकी सेवा करता है तो रब का बन जाएगा, चलता चल तू चलता चल
        प्रमोद कुमार शर्मा : बड़ा ही गहरा ज़हर भरा, मन आत्मा पर चढ जाता है। लिखी लिखाई प्रीत की पाति, सबका रस ये पी जाती है,..  शिव दाधीच बीकानेरी : सब्जी महंगी आटा महंगा, आलू और टमाटर के चक्कर में देशभक्ति कि सारी बातें भुल गये,.. विप्लव व्यास सुणलो सुणलो देस रा लौगा, इण माटी रौ गान.. घणी मुश्किल सूं मिली आजादी…   रामेश्वर साधक  :  जब श्राद्ध की श्रृद्धा, अंध श्रृद्धा कुप्रथा बनी, मृत्यु भोज, तर्पण तक थमी, श्राद्ध सार अपना न पाए, यही अंतस व्यथा है… आध्यात्म गंभीर रचना सुनाई
       महबूब अली : हिंदू धर्म की अनोखी शान है पीपल, देवी देवताओं की दिल की पहचान है पीपल,..  कृष्णा जी  :  श्राद्ध की परंपरा को वैदिक युग से माना जाता, भारतीय संस्कृति में पूर्वजों का सम्मान मन से किया जाता है,..   सिराजुद्दीन भुट्टा : बड़े सलीके से लबों को खोलना, जो ना खोला…   केशव हर्ष : मरूधर माही थनै मनै सब ढाणी मजरा गांव खेजड़ी… पवन चड्ढ़ा : चिंगारी जो भड़के, तो सावन उसे बुझाएं ,..    कैलाश दान चारण देशनोक :  सुख के सब साथी दुःख में न कोई

        आज़ के कार्यक्रम में 14 प्रस्तुतियां रही तथा कार्यक्रम में महेश हर्ष, राधा किशन सोनी, घनश्याम सौलंकी, वेदांत भाटी, मानवेन्द्र सोलंकी, केशव हर्ष, तिरुपति हर्ष, छोटू खां, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने रसीले अंदाज में आकाश वाणी के से.नि. वरिष्ठ उद्घोषक प्रमोद कुमार शर्मा ने किया जबकि आभार ओमप्रकाश भाटी ने व्यक्त किया

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Gordhan Soni

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