कलाकार उसे कहते हैं जिसकी क ला का लोहा चारों तरफ होता है, कलाकार के दिलों दिमाग में अपना किरदार छुपा होता है, और वही कला को अपने परिवार के सदस्यों में अपना ले तो कला जीवित हो जाती है छोटी काशी
बीकानेर में भी एक ऐसा परिवार है जिसकी तीन पीढियां से एक अलग ही किरदार निभाते आ रहे हैं, जी हां हम बात कर रहे हैं बीकानेर नगर के ख्याति नाम परिवार आहूजा परिवार की, जिनके सदस्यों में आज लगातार तीसरी पीढ़ी दादा, चाचा, भतीजा बीकानेर दशहरा कमेटी में रावण की भूमिका निभाते आ रहे हैं, शहर में निकलने वाले उत्सव की झांकी में पहली पीढ़ी स्वर्गीय माधव दास आहूजा ने 23 वर्ष तक इस परंपरा को निभाया दूसरी पीढ़ी पूर्व आयकर अधिकारी शिवाजी आहूजा ने 25 वर्ष तक के परंपरा को निभाया
अब उनके भतीजे तीसरी पीढ़ी पत्रकार रंग कमी और एंकर में पिछले 23 वर्षों से अपनी खतरनाक हंसी के साथ पूरे एक तरफ शहर के पराकोटे में नन्हे बच्चों को आशीर्वाद देते हैं तो दूसरी तरफ बच्चों को टॉफियां बिस्किट प्रसाद बांटते हैं बीकानेर जय नारायण व्यास कॉलोनी सेक्टर नंबर 5 मैं रहने वाले पड़ोसी उनके परिवार और उनकी पत्नी को लोग मंदोदरी भाभी के नाम से पुकारते हैं तो वह गर्व महसूस करती है, के कुमार आहुजा ने रूबरू में बताया कि मैं जीवन के 68 बसंत देख लिए अब मेरी अंतिम इच्छा है कि मैं श्री राम जी के साथ युद्ध में अभिनय करके अपने प्राण उनके चरणों में रखो जय श्री राम जय श्री जय लंकेश














