

नोखा धर्मनगरी नगरी में चातुर्मास सत्संग समिति नोखा की ओर से 29 जुलाई से 20 अक्टूबर 84 दिन तक परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज (वृंदावन) के सानिध्य में आयोजित भव्य चातुर्मास महोत्सव का समापन मंगलवार 20 अक्टूबर को प्रातः 9 से 11 बजे तक देवी भागवत कथा के पश्चात पूजा पूर्णाहुति और दोपहर में विशाल भंडारा के साथ ही हो जावेगा। आयोजित कथा के 83वें दिन सोमवार 19 अक्टूबर को प्रातः देवी स्वरूपा कन्याओं के पैर धुलवाकर उनकी पूजा की गई और उन्हें भोजन प्रसाद के बाद उन्हें दक्षिणा व फल दिये गये। इसके अलावा कई अन्य लोगों द्वारा भी किसी ने टोफियां तो किसी ने पेन तो किसी ने अन्य उपहार भी देते हुए देवी स्वरूपा कन्याओं के चरण छूकर आशीर्वाद लिया।
इससे पूर्व नित्य होने वाले 100 कुण्डीय अमृतचण्डी महायज्ञ में प्रातः 8 से 11 बजे व द्वितीय पारी में सांय 3 से 6 बजे तक यजमानों की तरफ से बाहर से आये 251 विद्वान ब्राह्मण पंडितों, आचार्यों द्वारा महायज्ञ शाला में 100 हवन कुण्डों में आहुतियां दीं। प्रतिदिन होने वाली कथा में दोपहर 3 बजे से सांय 6 बजे तक परम पूज्य डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य महाराज ने हजारों की तादाद में उपस्थित नर-नारी श्रोताओं को श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण की कथा के साथ-साथ ज्ञानवर्धक बातों पर वो ऊंचे शब्दो में गरजते हुए कटु व सही संदेश देने से भी नहीं चूके। उन्होंने संस्कृति और संस्कार पर कहा कि आज की पीढ़ी बाहर जाकर अपने संस्कार भूल जाते हैं और वहीं अपनी शादी कर लेते हैं। पहले माता-पिता को भगवान का दर्जा देते थे लेकिन आज वो बात नहीं रही उल्टा उन्हें वृद्धाश्रम में भेज देते हैं। बच्चों के पास माता-पिता के लिए समय ही नहीं है। महाराज ने कहा कि मेरी इन बातों से आपको बुरा तो लग रहा है लेकिन आपके और बच्चों के हित के लिए कड़वी और सही बोले बिना मुझसे रहा नहीं जाता। माताओं की ओर इशारा करते हुए अपनी पुत्रियों का ध्यान रखने का आग्रह किया। इस ऐतिहासिक आयोजन में सांय 6:30 बजे काशी की तर्ज पर हुई अंतिम महाआरती के दौरान विशाल खुला क्षेत्र भी छोटा पड़ गया। सोमवार को भी लंबी चौड़ी यज्ञशाला की परिक्रमा लगाने वालों में इजाफा देखने में आया। कई श्रद्धालु तो हाथों में 108 मनका की माला के मणियों की गिनती तो कुछ व्यक्ति अपने मोबाईल के सहारे तो कोई अपनी उंगली में राम-राम की माला फेरने वाली छोटी सी इलैक्ट्रीक मशीन आदी के सहारे से परिक्रमा लगा रहे है। इस परिक्रमा व काशी वाली आरती का यह सोमवार का अंतिम दिन था। मंगलवार 20 अक्टूबर को सुबह 9 से 11 बजे तक देवी भागवती कथा के उपरांत पूर्णाहुति की पूजा होगी और उसके बाद महाप्रसाद भंडारा के साथ ही दोपहर 4 बजे तक आयोजन पूर्ण एंव ऐतिहासिक सफल होकर सम्पन्न हो जायेगा। ज्ञात रहे नोखा में आयोजित इस ऐतिहासिक भव्य चातुर्मास के बारे कोई भी नहीं जानता था कि यह आयोजन इतना बड़ा ऐतिहासिक रूप लेकर नोखा के इतिहास का रूप ले लेगा। हर किसी की जुबां पर है कि ऐसा भव्य धार्मिक आयोजन पहली बार देखा। आयोजन में लाखों रूपए की सहायता देने वालों की कमी नहीं है तो दान पेटिका भरने वालों की भी कमी नहीं है। अच्छा खासा धन बरसने के कारण आयोजक समिति भी व्यवस्थाओं में कमी नहीं रख रही है। हर समय निशुल्क चाय, लोटस की लस्सी (छाछ), प्रसाद के रूप में हर रोज सांय भंडारा (भोजन) चौंहूँ ओर इस आयोजन की प्रशंसा हो रही है।
विद्यालय परिसर में अति आकर्षित संजीव झांकिया भी दर्शकों का मन मोह रही है। परिसर स्थित संत कुटिया में परम पूज्य दण्डी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज भी कुटिया में बैठकर आने वालों को मनोकामना पूर्ण होने का आशिर्वाद देते रहे है। आयोजन में विभिन्न व्यवस्थाओं को संभालने वालों ने भी पूर्ण सहयोग दिया। महाराज श्री ने सभी को आशीर्वाद दिया। इस आयोजन में प्रहलाद मोहता, गिरधारी पारीक, दामोदर तिवारी, नारायण राठी, पवन चांडक, बृजमोहन डागा, पवन लाहोटी, ओमप्रकाश तिवारी, रामेश्वर छींपा, पवन कोठारी, जुगल लोहिया, राजु बाहेती, श्रवण पाईवाल, मेघराज लाहोटी, सीताराम मोहता सहित बड़ी तादाद में कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा। आयोजक समिति के मीडिया प्रभारी इन्द्रचन्द मोदी ने प्रेस नोट जारी कर यह जानकारी दी।













