





तीन दिवसीय अजमीढ़ जयंती समारोह का हुआ समापन, पहलवानों ने दिया नशामुक्ति और भारतीय अखाड़ा संस्कृति का संदेश
बीकानेर, 27 अक्टूबर। जस्सूसर गेट के बाहर रांकावत भवन के पास मंगलवार को महाराजा श्री अजमीढ़ जी की जयंती के अवसर पर पत्थर के माल्हे उठाकर पारंपरिक शारीरिक शक्ति प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और पहलवानों ने अपनी शारीरिक क्षमता एवं दमखम का प्रदर्शन किया। इसी के साथ तीन दिवसीय महाराजा अजमीढ़ जयंती समारोह का समापन हुआ।इस अवसर पर पूर्व पहलवान महावीर कुमार सहदेव की टीम के पहलवानों ने पारंपरिक पत्थर के माल्हे उठाकर भारतीय देसी व्यायाम पद्धति और अखाड़ा संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने, शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनने तथा भारतीय कुश्ती और पारंपरिक व्यायाम की गौरवशाली परंपरा से जुड़ने का संदेश दिया गया।
उल्लेखनीय है कि पूर्व पहलवान महावीर कुमार सहदेव की टीम की ओर से स्वर्णकार समाज के आराध्य महाराजा श्री अजमीढ़ जी की जयंती पर पिछले कई वर्षों से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में धार्मिक गतिविधियों के साथ वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्यक्रम भी शामिल रहते हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यायाम पद्धतियों को बढ़ावा देना, नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना तथा शारीरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोवर्धन सहदेवड़ा एवं आनंद सोनी ने की। मुख्य अतिथि सत्यनारायण गहलोत तथा अखिल भारतीय माल्हा भारोत्तोलन संघ, राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व पहलवान महावीर कुमार सहदेव ने बीकानेर चैंपियन सेठी राठौड़ को पुरस्कार प्रदान किया।
वहीं, विशिष्ट अतिथि नरेंद्र कुमार देवड़ा एवं नत्थू सिंह राजपुरोहित सहित अन्य अतिथियों ने विभिन्न भार वर्गों में माल्हा उठाने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान नेमपाल चौहान, शिव गहलोत, अंकित चांडक, कान सिंह कुचामन एवं भीम सिंह सहित अन्य खिलाड़ियों ने भी अपने-अपने वर्ग में प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में पारंपरिक शारीरिक शक्ति, अनुशासन और देसी व्यायाम के प्रति युवाओं के उत्साह ने भारतीय अखाड़ा संस्कृति की महत्ता को रेखांकित किया। आयोजन के माध्यम से महाराजा श्री अजमीढ़ जी की जयंती को धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पारंपरिक खेल और व्यायाम को प्रोत्साहित करने के संकल्प के रूप में मनाया गया।
द्वारा- महावीर कुमार सहदेव












