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आठ दिवसीय (अष्टान्हिका) महोत्सव
भगवान पाश्र्वनाथ व अन्य देवों व तीर्थंकरों का 18 अभिषेक
27 जोड़ों द्वारा उवसग्गहरं महापूजन

आठ दिवसीय (अष्टान्हिका) महोत्सव
भगवान पाश्र्वनाथ व अन्य देवों व तीर्थंकरों का 18 अभिषेक
27 जोड़ों द्वारा उवसग्गहरं महापूजन आज
बीकानेर, 30 अप्रेल। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ की वरिष्ठ साध्वीश्री, सज्जनमणि, प्रवर्तिनी शशि प्रभा म.सा. के सान्निध्य में गंगाशहर रोड की श्री पाश्र्वचन्द्र सूरि गच्छीय दादाबाड़ी में चल रहे आठ दिवसीय (अष्टान्हिका) महोत्सव में शनिवार को भक्ति संगीत के साथ भगवान पाश्र्वनाथ व तीर्थंकरों तथा देवों का 18 अभिषेक जैन आगम के मंत्रों के साथ किया गया।
साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने प्रवचन में कहा कि देव, गुरु व धर्म के साथ आशीर्वाद व पुण्योदय से (अष्टान्हिका) का आयोजन करने और वर्षी तप जैसी तपस्या लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि तपस्या व महोत्सव की अनुमोदना करने से भी पुण्य मिलता है। हमें तपस्वियों का वंदन व अभिनंदन करते हुए धर्म-ध्यान व भक्ति में जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पापों के प्रति सावधान तथा पुण्यों के प्रति सचेष्ट रहें।
महोत्सव के प्रमुख संघवी व वरिष्ठ श्रावक राजेन्द्र लूणियां ने बताया कि संघवी श्रीकृृष्णा लूणियां व अंजू लूणियां के वर्षीतप के उपलक्ष्य चल रहे महोत्सव में शनिवार को परमात्मा का 18 अभिषेक मंदासौर से आए विधिकारक अरुण भाई जैन ने सविधि करवाया। एक मई रविवार को सुबह नौ बजे प्रवचन के बाद 27 जोड़ों द्वारा उवसग्गहरं महापूजन किया जाएगा। सोमवार को 44 जोड़ों द्वारा भक्तामर महापूजन, 3 मई अक्षया तृतीया को सवा ग्यारह बजे वर्षीतप पारणा, दोपहर सवा बारह बजे लघु शांति स्नात्र पूजा व रात आठ बजे भक्ति संध्या , 4 मई बुधवार को सुबह नौ बजे सुकृत अनुमोदनार्थ महोत्सव व दोपहर ढाई बजे से दादा गुरुदेव की पूजा का आयोजन होगा।
महोत्सव में शनिवार को अष्टादश अभिषेक में स्वर्णजल,पंच रत्न,कषाय चूर्ण,मंगल मृृतिका,सद््औषधि, दो तरह के अष्टवर्ग, विभिन्न तरह की औषधियों, पंचामृृत,गंध, पुष्प, सुंगध औषधि, वासक्षेप, चंदन,दूध,केसर, तीर्थजल, कस्तूरी,गोचरन व अम्बर आदि का उपयोग किया गया। घाणेराव, पाली से आए संगीतकार रंगलाल एवं पार्टी ने अभिषेक के दौरान व शाम को भक्ति कार्यक्रम में ’’भक्ति की है रात दादा आज थाने आणो है’’, सहित अनेक भजन दादा गुरुदेवों, भगवान आदिश्वरनाथ, भगवान महावीर, भगवान पाश्र्वनाथ और भैरवजी आदि देवों के प्रस्तुत किए। पार्टी में महेन्द्र कुमार, महेश व विक्रम में विभिन्न साज व आवाज के साथ सहयोग किया। महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के अनेक इलाकों से श्रावक-श्राविकाएं आएं हुए है।

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Gordhan Soni

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