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आत्मा का मुख्यगुण ज्ञान-साध्वीश्री मृृगावतीश्रीजी म.सा.
सामूहिक जाप व विभिन्न तपस्याएं आज से
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आत्मा का मुख्यगुण ज्ञान-साध्वीश्री मृृगावतीश्रीजी म.सा.
सामूहिक जाप व विभिन्न तपस्याएं आज से
बीकानेर, 12 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की मनोहरश्रीजी म.सा की सुशिष्या साध्वीश्री मृगावतीश्रीजी म.सा., बीकानेर मूल की साध्वीश्री सुरप्रियाश्रीजीम.सा व नित्योदया श्रीजी म.सा के सान्निध्य में बुधवार को चातुर्मास के विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। देश दुनियां में रोग, शोक महामारी व उपद्रव को निवारण के लिए भगवान श्री श्ांखेश्वर पार्श्वनाथ के सवा करोड़ मंत्र जाप, सामूहिक प्रतिक्रमण, विभिन्न तपस्याओं का अनुष्ठान शुरू होगा।
रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में मंगलवार को नियमितत प्रवचन में साध्वीश्री मनोहरश्रीजी की शिष्या साध्वीश्री मृगावती जी.म.सा. ने बताया कि ’’ऊं ही्र श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नमः’’ मंत्र परम प्रभावी, संकट परिहारक, मनोवांछित पूरक व विश्व शांति प्रदायक है। यह सर्व जीवों का कल्याण करने वाला है। जाप 40 दिन चलेगा जिसमें प्रत्येक श्रावक श्राविका 23 वें परमात्मा के 25 माला प्रतिदिन फेरेंगे।
पौषध व प्रतिक्रमण आज-गुरुपूर्णिमा व चातुर्मासिक चतुर्दशी के एक साथ होने से बुधवार को गुरुपूर्णिमा महोत्सव के साथ सामूहिक पौषध व प्रतिक्रमण के अनुष्ठान शुरू होंगे। श्रावक-श्राविकाएं दिन भर उपासरे में रहकर साधु-साध्वीश्री साधना,आराधना व भक्ति और धार्मिक क्रिया करेंगे। बुधवार को सुबह सवा छह बजे उपासरे में पौषध की धार्मिक क्रिया शुरू होगी।
आत्मा का मुख्यगुण ज्ञान-मंगलवार को नियमित प्रवचन में साध्वीश्री मृगावती जी.मा. ने कहा कि आत्मा का मुख्यगुण ज्ञान है। जीवन के निर्माण व निर्माण में ज्ञान की अहम भूमिका है। दुःख-संकट की घड़ियों में सद््ज्ञान, सम्यक ज्ञान की ताकत व्यक्ति को संतुलित व शांत और प्रसन्न रखती है। चातुर्मास ज्ञान की आराधना का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। हमें प्रमाद का त्याग कर सम्यक ज्ञान प्रकटीकरण की मनोहारी ज्ञान गंगा से अधिकाधिक लाभान्वित होना है। सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने बताया कि बाहर से आने वाले श्रावक-श्राविकाओं के प्रवास व भोजन की व्यवस्था महावीर भवन में की गई है।

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Gordhan Soni

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