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शुद्ध भाव व प्रसन्नता से की गई सामायिक सार्थक-साध्वीश्री मृगावती
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शुद्ध भाव व प्रसन्नता से की गई सामायिक सार्थक-साध्वीश्री मृगावती
बीकानेर, 15 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की मनोहरश्रीजी म.सा की सुशिष्या साध्वीश्री मृगावतीश्रीजी म.सा., बीकानेर मूल की साध्वीश्री सुरप्रियाश्रीजीम.सा व नित्योदया श्रीजी म.सा के सान्निध्य में रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में शुक्रवार से मनोवांछित फल प्रदाता, कर्मों का क्षय कर मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करने वाला 30 दिवसीय सौभाग्य कल्पवृक्ष तप, बच्चों का धर्म, ध्यान एवं ज्ञान शिविर शुरू हुआ।
सुगनजी महाराज के उपासरे में गुरुवार को साध्वीश्री मृगावती जी.मसा. व नित्योदयाश्रीजी म.सा.ने कहा कि जैन धर्म में 8 सामायिक में सत्य वचन या कथन व समास सामायिक का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा वाणी को समझते व स्वीकार करते हुए श्रेष्ठ श्रावक बने। सामायिक की व्याख्या को जीवन आचरण में उतारें। उन्होंने कहा कि कम, मीठा व धीरे बोले तथा गिने चुने शब्दों का उपयोग करें। सामायिक में शब्द भाव अधिक महत्वपूर्ण है। सामायिक साधक करुणा, दया व समता भाव में रहते हुए मौन से जाप, समत्व, समता, शांत भाव से सामयिक की साधना करें। शुद्ध भाव व प्रसन्नता से की गई सामायिक से आत्मिक आलोक, प्रकाश व मनोहरमय बन जाता है।

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