
आरबीआई ने बैंकों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उसने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण बैंकों को जो छूट दी गई थीं, उनके वापस लेने के बाद उन्हें पूंजी की दिक्कत हो सकती है। इसका असर उनकी बैलेंस शीट पर भी दिख सकता है। आरबीआई ने सोमवार को छमाही फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट जारी की। इसकी प्रस्तावना में गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह बात लिखी है।
मार्च 2020 में एनपीए 8.4%, सितंबर 2020 में 7.5% था
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2021 में बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) 13.5% तक जा सकते हैं। हालात खराब हुए तो यह 14.8% तक पहुंच सकता है। यह 24 साल में सबसे अधिक होगा। इससे पहले 1996-97 में बैंकों का ग्रॉस एनपीए 15.7% था। मार्च 2020 में यह 8.4% और सितंबर 2020 में 7.5% था।
रियायतें वापस लेने के बाद बाहर आएगी बैंकों की समस्या
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महामारी के कारण सिस्टम में कैश बढ़ा। बैंकों के लिए कर्ज देने की शर्तों में भी ढील दी गई। अब जब रेगुलेटरी छूट वापस ली जा रही हैं, तो ऐसे में बैंकों की समस्या बाहर आ सकती है। महामारी और लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों की नौकरी जाने के बाद पिछले साल आरबीआई ने लोगों और कंपनियों के कर्ज की एक बार रिस्ट्रक्चरिंग करने की इजाजत दी थी। बैंकों को इस बात की इजाजत भी दी गई थी कि वे चाहें तो कर्ज लेने वालों को किस्तें चुकाने में 6 महीने तक छूट दे सकते हैं।














