
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने के एक दिन बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। 80 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र भेजा है।
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 2 उम्मीदवार मैदान में हैं। एक ओर शशि थरूर हैं तो वहीं दूसरी ओर मल्लिकार्जुन खड़गे हैं। इस रेस में मल्लिकार्जुन खड़गे की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। नामांकन के दौरान भी उनकी मजबूती देखने को मिली, जब पार्टी के कई वरिष्ठ नेता वहां मौजूद रहे। अगर दोनों की ओर से नामांकन वापस नहीं लिया जाता है तो 17 को इसके लिए मतदान होंगे और 19 को नतीजे भी आ जाएंगे।
अगर मल्लिकार्जुन खड़गे जैसा कि इस रेस में आगे दिखाई दे रहे हैं, कांग्रेस के अध्यक्ष चुने जाते हैं तो 50 सालों के बाद यह ऐसा पहला मौका आएगा जब कांग्रेस का अध्यक्ष दलित परिवार से आता हो। 1970-71 के दौरान जगजीवन राम कांग्रेस के अध्यक्ष थे। इसके बाद कांग्रेस में कोई भी दलित नेता अध्यक्ष नहीं बना था।
80 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार के बेहद ही भरोसेमंद माने जाते हैं। वह जमीन से जुड़े राजनेता रहे हैं। 9 बार के विधायक और दो बार के लोकसभा सांसद रहे मल्लिकार्जुन खड़गे अब तक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। दलित परिवार में जन्मे हट गए 1972 में पहली बार विधायक चुने गए थे।
तब से लगातार 2009 तक वह विधायक रहे। दो बार ऐसे मौके आए जब मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक में मुख्यमंत्री बन सकते थे। लेकिन उन्होंने आलाकमान के फैसले का समर्थन किया और किसी और के मुख्यमंत्री बनने पर ऐतराज भी नहीं जताया। अपने गृह राज्य कर्नाटक में मल्लिकार्जुन खड़गे‘सोलिल्लादा सरदारा’ (कभी नहीं हारने वाला नेता) के रूप में मशहूर हैं। खड़गे 50 साल से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं।
















