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बाड़मेर- ब्रह्म खत्री समाज के चौथे सामूहिक विवाह महा-महोत्सव-तुलसी ग्यारस को 44 जोड़ों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई….
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जयपुर विशाल पांडाल में बीस हज़ार से भी ज्यादा जन समुदाय के बीच तुलसी ग्यारस को 44 जोड़ों ने जैसे ही एक साथ एक दूसरे को वर माला पहनाई – ढोल- नगाड़ों व दुंदुभि से आकाश गुंजायमान हो उठा । चारों तरफ लोगों ने हिंगलाज माता के जयकारे के गगनभेदी नारे लगाए । मौका था बाड़मेर की कुशल वाटिका में खत्री न्याति पंचायत व खत्री सामुहिक विवाह संस्थान बाड़मेर के संयुक्त तत्वावधान में ब्रह्म खत्री समाज के चौथे सामूहिक विवाह महा-महोत्सव का । जिसको अंजाम दिया राणाजी, जगदीश खत्री, सामूहिक विवाह संस्थान के उपाध्यक्ष गणेशमल छूँछा व समाजसेवा के प्रति अनुभवी जुझारू एवं समर्पित संयोजक नंदकिशोर छूंछा…

आयोजन के साक्षी बने मरुधर ज्वैलर्स मुम्बई के सुप्रसिद्ध समाजसेवी औम जी खत्री, बंगलोर के जगदीश जी खत्री, जोधपुर के औम प्रकाश गांधी, समाजसेवी कृष्णा खत्री , तेजाराम किरी, राधा नेमिचंद छूँछा, चेतनराम किरी, दिलीप छूँछा, व जयपुर से पधारे माता हिंगलाज एन्ड वरुण देव चैरिटेबल ट्रस्ट ( पंजी.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष खत्री राजेन्द्र मोदी ( रायमलानी ) ।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि समाजसेवी एडवोकेट खत्री राजेन्द्र मोदी ने बाड़मेर मॉडल की प्रशंसा की तथा पूरे देश के खत्रियों से आव्हान किया कि समाज का वास्तविक विकास करना है तो वे भी अब बिना दहेज के दिन के फेरे स्वीकार करें ।उन्होंने स्व-रचित कविता:

बुरे कर्म जितने भी हैं – वे अंधियारे में होते हैं । आतिषबाजी-शराब-भंगड़ा- कुकर्म की जड़ होते हैं ।।

लड़के-लड़कियां संग-संग नाचे, होश-हवास सब खोते हैं,
इसलिए अब तो ये गंदे रिवाज, सब जड़ से चकनाचूर करो ।

खत्री बंधुओ उठो जरा – रूढिवादिता दूर करो, सौ मर्जों की एक दवा है- बिन दहेज, दिन के फेरे शुरू करो ।। सुना कर तालियां बटोरते हुए लोगों की खूब वाह वाही लूटी ।

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