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“मायड़ भासा री मान्यता री मांग करो रे राजस्थानीयों ” धमाळ हुई रीलीज


राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए एकजुट हुए कलाकार


हनुमानगढ़

राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता भले ही ना हो परंतु राजस्थानी कलाकारों ने इसे घर घर तक पहुंचाया है। फागुन लगते ही धमाल मचने वाली है इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजस्थानी फिल्मकार रामदास बरवाली ने राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर पहली धमाल को रिलीज किया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों थालड़का के मुख्य गुवाड़ में 3 धमालों की शूटिंग हुई थी। “छुट्टी आज्या रे फौजीड़ा, ढोला विडियो बणाद्यो म्हारो नाचण रो, मायड़ भाषा री थे मान्यता री मांग करो रे राजस्थानीयो” आदि धमालों पर राजस्थानी कलाकारों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया था।

निदेशक रामदास बरवाली ने बताया कि इसी कड़ी में पहली धमाल “मायड़ भासा री मान्यता री मांग करो रे राजस्थानीयों” को रिलीज किया गया है। 3 धमालों में राजस्थानी भाषा की मान्यता, किसान के सुख दु:ख, फौजी की देशभक्ति आदि विषयों को समेटा है। रामदास बरवाली ने कहा कि राजस्थानी कलाकार राजस्थानी में लगातार बढ़िया काम करके राजस्थानी फिल्म उद्योग को मजबूत कर रहे हैं जिसका फायदा हमारे प्रदेश को होगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर प्रदान होंगे।


राजस्थानी कलाकारों ने मचाई धमाल :-

लेखक व निर्देशक रामदास बरवाली,
मुख्य कलाकार में रामदास बरवाळी, मुस्कान खत्री, राजवीर बंजारा, कॉमेडियन महेन्द्र, सुनील बरवाली, गौरीशंकर चाईया, रेणु अबोहर, अमित सालीवाला, राखी लाम्बा, गितिका, वेद झोरड़, हरीश हैरी, पवन शर्मा, पेमाराम थालड़का, लाधूराम भार्गव, भानीराम बाबरीया, सोनू स्वामी, नरेश मित्तल, प्रह्लाद शर्मा, ओमप्रकाश, राजू, मोनू , प्रदीप, गोविंद स्वामी, राम निनाणिया, सपना, वर्षा, कैमरामैन विनोद बरवाली समेत अनेक कलाकारों ने धमाल मचाई। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीण भी शूटिंग देखने के लिए उमड़े। राजस्थानी धमाल को सुनकर ग्रामीण भी खूब थिरके। लोगों ने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए। इस दौरान अपने चहेते राजस्थानी कलाकारों, कॉमेडियन को देखकर लोग सेल्फी लेते भी नजर आए। बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं, युवा, बुजुर्ग शूटिंग स्थल पर पहुंचे थे।


राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर खुद दें मान्यता :- हरीश हैरी

राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर मान्यता देने वाले पहले मॉडल गांव बहलोलनगर में जब ग्रामीण हर काम राजस्थानी में कर सकते हैं तो वैसा ही काम हम राजस्थान के हर गांव में क्यों नहीं कर सकते? यह बात कही आपने राजस्थान आपने राजस्थानी के संयोजक हरीश हैरी ने। हरीश हैरी ने कहा कि राजस्थानी को व्यवहार की भाषा बनाकर जनता को पहले खुद मान्यता देनी होगी तभी सरकार झुकेगी। उन्होंने राजस्थानी कलाकारों से अपील की कि सोशल मीडिया पर राजस्थानी लिखनी भी शुरू करें। सोशल मीडिया पर लगातार राजस्थानी सामग्री जितनी ज्यादा होगी उतना ही मान्यता जल्दी मिलेगी। लोग भाषा, बोली, लिपि आदि पर सवाल खड़ा नहीं करेंगे।

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Gordhan Soni

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