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कहासुनी के बाद गबन की कार्यवाही से बचने को सचिव ने दर्ज करवायी महापौर पर एफआईआर?….

नगर निगम बीकानेर में महापौर सुशीला कंवर और सचिव हंसा मीणा के बीच 16 फरवरी को हुई गहमागहमी के मामले में अब रोचक मोड़ आया है। सचिव हंसा मीणा ने बीती शाम 8 बजे बीछवाल थाना में महापौर सुशीला कंवर और उनके निजी सचिव अनंत पारीक पर राजकार्य में बाधा, गाली गलौच सहित एससी एसटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई है। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के एक दिन पहले हुए इस मामले में एक ऑडियो भी सामने आया जिसमे सचिव हंसा मीणा महापौर को गुंडे बुलवाने,फालतू की बकवास मत कर, तुझे टिकने नहीं दूंगी, तू जेल में होती जैसी बाते कहती सुनाई पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर इस ऑडियो में महापौर सुशीला कंवर नियमों और कायदे के साथ आप जैसे शब्दों के प्रयोग के साथ संयमित भाषा में बात करती सुनाई दे रही है।जिसके बाद सत्ता और विपक्ष के पार्षदों द्वारा संयुक्त प्रदर्शन किया गया और कलेक्टर के निर्देशानुसार आयुक्त अरुण प्रकाश शर्मा द्वारा सचिव हंसा मीणा को आवंटित सभी चार्ज वापस ले लिए गए।
इस पूरे प्रकरण के अगले दिन कल देर शाम एफआईआर दर्ज करवाने के पीछे नया कारण सामने आया है। निगम कार्मिकों के बीच चर्चा है की कल सुबह निगम की यंत्रालय शाखा में महापौर के औचक निरीक्षण में भरी गड़बड़ियां सामने आई । महपौर ने तत्काल आयुक्त अरुण प्रकाश शर्मा को यंत्रालय तलब किया।
महापौर ने सचिव हंसा मीणा को आवंटित इनोवा वाहन की फाइल देखी जिसमें ठेकेदार के साथ किया गया अनुबंध नोटरी नहीं था साथ ही पिछले 2 महीने में सचिव मीणा के ज्वाइनिंग के बाद से गाड़ी का अनुबंध हुआ है निगम में किसी भी कर्मचारी ने यह इनोवा गाड़ी देखी ही नही। जयपुर नंबर की इस गाड़ी की लोग बुक में रोजाना दीनदयाल सर्किल से सिटी राउंड की एंट्रियां दर्ज है। और पिछले दो महीने में सचिव हंसा मीणा के सत्यापन के आधार पर कुल 45000 का भुगतान भी निगम द्वारा किया जा चुका है। इसी दौरान आयुक्त अरुण शर्मा द्वारा सचिव से पूछे जाने पर इनोवा कलेक्ट्रेट में होना बताया । जिस पर आयुक्त ने अपने पीए को सत्यापन के लिए भेजा लेकिन इनोवा वहां नहीं मिली। दरअसल यह इनोवा कभी बीकानेर आई ही नहीं इस बोगस वाहन के आधार पर सचिव मीणा द्वारा सत्यापन कर हर महीने 27900 का भुगतान ठेकेदार को किया जा रहा था। जिस पर आयुक्त ने सचिव मीणा को दोपहर 3:50 पर मेल के माध्यम से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया । सचिव मीणा द्वारा इसके बाद 4:06 बजे आधे दिन की सीएल चाही गई और इसके बाद देर शाम 8 बजे सचिव ने महापौर सुशीला कंवर और उनके निजी सचिव अनंत पारीक पर एफआईआर दर्ज करवाई।
इस पूरे प्रकरण के बाद सचिव मीणा खुद सवालों के घेरे में है। जब 16 फरवरी को सुबह 10 बजे पूरा घटनाक्रम हुआ तो लगभग 34 घंटे बाद जिस दौरान महापौर द्वारा सचिव का गबन पकड़ा गया और कारण बताओ नोटिस जारी हुआ उसके बाद एफआईआर क्यों लिखवाई गई? क्या सचिव कार्यवाही से बचने के लिए महापौर पर झूठा दबाव बनाना चाहती है?
खैर फिलहाल पूरा मामला पुलिस के पास अनुसंधान में है और दूसरी तरफ महापौर ने भी गबन के पूरे प्रकरण पर आयुक्त को जांच तथा यंत्रालय प्रभारी मुकेश कुमार को वाहन के सत्यापन की रिपोर्ट के निर्देश जारी किए है।

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