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नही रहे लक्ष्मीनारायण जी रंगा

नमन????

हिंदी, राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, नाटककार, कथाकार लक्ष्मी नारायण जी रंगा का अभी निधन हो गया। उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली का सर्वोच्च राजस्थानी भाषा पुरस्कार भी इन्हें मिला। साहित्यकार कमल रंगा, राजेश रंगा भी उन्हीं की साहित्य व शिक्षा की विरासत को संभाले हुए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को ये कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति

Update
शुक्रवार सुबह होगा अंतिम संस्कार
बीकानेर, 9 मार्च। वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा का गुरुवार देर शाम निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनका इलाज पीबीएम अस्पताल में चल रहा था।
उन्होंने सौ से अधिक पुस्तकें लिखी। वे सरकारी सेवा में भाषा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त थे। रंगा ने नाटक, उपन्यास, कहानी, कविता, रिपोर्ताज, फिल्म, धारावाहिक का लेखन किया। इनका लिखा नाटक ‘अमर शहीद’ दसवीं के पाठ्यक्रम में लंबे समय तक राजस्थान के विद्यार्थियों को प्रेरित करता रहा।
लक्ष्मी नारायण रंगा को साहित्य अकादेमी का प्रतिष्ठित भाषा पुरस्कार उनके राजस्थानी नाटक ‘पूर्णमिदम’ के लिए अर्पित किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र कमल रंगा राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार हैं। छोटे पुत्र राजेश रंगा निजी स्कूल के संचालक हैं।
रंगा की अंत्येष्टि शुक्रवार को नत्थूसर गेट के बाहर राजरंगों के श्मशान में सुबह 9 होगी।
उनके निधन पर शहर के साहित्यकारों ने शोक जताया है।

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Gordhan Soni

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